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जीएसटी के चलते 1.80 लाख नौकरियों पर मंडराया खतरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 18:56 IST

मोदी सरकार के सिंगल टैक्स यानी जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के मसौदे में टैक्स कलेक्शन ऐट सोर्स (टीसीएस) के मुद्दे ने फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और अमेजॉन को एक साथ ला दिया. बृहस्पतिवार को इस मुद्दे पर सभी ने एक सुर में अपनी बात कही और कहा इससे विक्रेताओं को अपने उत्पाद ऑनलाइन बिक्री करने में समस्या आएगी.

यह पहला मौका है जब यह तीनों कंपनियां एकजुट होकर सामने आईं हैं. एक दूसरे से कड़ी प्रतिस्पर्धा रखने वाली यह कंपनियां तेजी से बढ़ते भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में अपनी बादशाहत जमाने के लिए कड़े प्रयासों में जुटी हुई हैं. लेकिन अब जब इस उद्योग के सामने ही संकट की स्थिति आ गई, तो इन्हें एकसाथ मिलकर सामने आना पड़ा.

यूं तो इन कंपनियों ने भी जीएसटी को भविष्य के प्रमुख टैक्स के रूप में की जाने वाली पहल बताते हुए कहा है कि इसके उद्योग पर महत्वपूर्ण बदलाव होंगे. लेकिन टीसीएस नियम के चलते प्रतिवर्ष करीब 400 करोड़ रुपये की पूंजी फंस जाएगी और इससे अपने उत्पादों को ऑनलाइन बेचने वाले विक्रेता हतोत्साहित होंगे. इसके साथ ही इससे करीब 1 लाख 80 हजार नौकरियों में कमी आएगी, जिससे इस उद्योग में निवेश और इसके विकास में रुकावट देखने को मिलेगी.

फ्लिपकार्ट, अमेजॉन और स्नैपडील को मिलाकर 5000 करोड़ का नुकसान

बता दें कि टीसीएस क्लॉज के चलते ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को अपने सेलर्स (विक्रेताओं) को दी जाने वाली राशि में से एक हिस्सा काटकर सरकार के पास जमा करना होगा. जीएसटी के मसौदे पर इस माह के अंत में मुहर लगनी है. 

इस बाबत फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक सचिन बंसल ने मीडिया को बताया, "हमारा मानना है कि हमनें इस पूरे तंत्र में बहुत महत्वपूर्ण  बदलाव किया है... आज सैकड़ों और हजारों विक्रेता ऑनलाइन हैं और इनमें से तमाम उद्यमी और कई ऑफलाइन रिटेलर्स हैं... इस तंत्र को बनाने में हमनें एक लंबी दूरी तय की है. यह टीसीएस मुद्दे से अलग है. हमारा अनुमान है कि मौजूदा नियम के चलते सालाना 400 करोड़ रुपये की पूंजी फंस जाएगी जो विक्रेताओं के पास नहीं पहुंच पाएगी और इससे विक्रेताओं की कार्यशील पूंजी खत्म हो जाएगी, जिससे उन्हें ऑनलाइन आने में रुकावट आएगी और वे हमारे साथ नहीं जुड़ पाएंगे."

वहीं, अमेजॉन इंडिया के प्रमुख अमित अग्रवाल ने कहा, "हम सभी निर्धारित पैमाने से आगे निवेश कर रहे हैं और सटीक बुनियादी ढांचे एवं तंत्र को बनाने में भी काफी निवेश हो रहा है. विक्रेताओं को प्रशिक्षित/शिक्षित करने और उन्हें ऑनलाइन लाने के साथ ही ग्राहक हमारे बाजार में आएं इसमें भी काफी निवेश हो रहा है... पिछले कई सालों से यह चक्र चल रहा है... जब एक बार यह तंत्र सक्रिय हो जाए, तमाम अन्य उद्योगों को भी मुनाफा होगा."

इसके अलावा स्नैपडील के सह-संस्थापक कुनाल बहल ने कहा, "इन छोटेे व्यवसायों की सफलता को सक्षम करने के लिए हमें यह जरूर करना चाहिए. लेकिन टीसीएस इसकी भावना के पूर्णतया विपरीत है. ई-कॉमर्स डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया के एक दिलचस्प संगम पर है... सरकार को गंभीरतापूर्वक टीसीएस को देखना चाहिए क्योंकि यह हमारे उद्योग के लिए एक गंभीर बाधा बनेगा."

First published: 10 February 2017, 18:56 IST
 
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