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पतंजलि को टक्कर देने के लिए अमेरिकी कंपनी Amway को भी बदलना पड़ रहा है रूप

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 March 2018, 16:00 IST

पतंजलि आयुर्वेद की हर्बल मार्केट में लगातार बढ़ रही लोकप्रियता का असर है कि अमेरिकी डायरेक्ट सेलिंग कंपनी एमवे इंडिया एंटरप्राइजेज प्राइवेट अब हर्बल की तरफ कदम बढ़ा रही है. भारत में पारम्परिक हर्बल कंपनियां अपने उत्पादों में तुलसी, ब्राह्मी, अश्वगंधा, अमलाकी, विभेदकी और हरीताकी जैसी पारंपरिक भारतीय जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करती है.

इससे पहले निवेशकों को दी गई प्रजेंटेशन में कोलगेट ने खुलासा किया है पतंजलि  के दन्त कांति के बाद टूथपेस्ट मार्केट में 2015 के 57.4% के मुकाबले 2016 में उसकी हिस्सेदारी 55.6% फीसदी ही रह गई है

अब एमवे का कहना है कि  हम अपने भारतीय उपभोक्ताओं के पोषण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय पारंपरिक जड़ी-बूटियों का उपयोग करके इस तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं. पतंजलि के आने के बाद हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) और कोलगेट-पामोलिव (इंडिया) लिमिटेड, बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ऐसी स्थानीय इकाइयां थी जिन्होंने हर्बल टूथपेस्ट का इस्तेमाल किया.

 

कोलगेट ने पतंजलि के 'दन्त कांति' हर्बल टूथपेस्ट का मुकाबला करने के लिए आयुर्वेदिक टूथपेस्ट 'सीबाका वेदशक्ति' लांच किया. हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने (एचयूएल) ने अपने आयुर्वेदिक उत्पादों के लिए 'लीवर आयुष' को फिर से लॉन्च किया और केरल स्थित आयुर्वेदिक हेयर ऑयल ब्रांड इन्दुलेखा को 2016 में 330 करोड़ रूपए में खरीद लिया. अक्टूबर 2016 एचयूएल पतंजली आयुर्वेद के प्रभाव को स्वीकार किया और मुकाबले लिए हर्बल उत्पादों को लॉन्च किया.

एचयूएल का कहना है कि भारत में आयुर्देदिक उत्पादों का प्रभाव बढ़ रहा है. पतंजलि के आने के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित डाबर इंडिया लिमिटेड का शहद और च्यवनप्राश हुआ. जिसके बाद कंपनी ने हेयर आयल, शैंपू और हेल्थकेयर में कई नए लॉन्च किए हैं.

डाबर इंडिया के प्रबंधन के अनुमानों के मुताबिक 2020 तक भारत में आयुर्वेदिक उत्पादों की बिक्री 75% से अधिक हो जाएगी, जो वर्तमान में लगभग 60% है.

First published: 9 March 2018, 16:00 IST
 
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