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कर्ज में डूबे अनिल अंबानी को झटका, अब बड़े भाई से सौदे में आयी कानूनी अड़चन

सुनील रावत | Updated on: 7 March 2018, 12:33 IST

उद्योगपति अनिल अंबानी की टेलीकॉम कंपनी आरकॉम पर बैंकों का बड़ा कर्ज है. इस कर्जे से निपटने के लिए अनिल अंबानी आरकॉम के एसेट्स बेचना चाहते थे लेकिन एक आर्बिट्रेशन कोर्ट इस पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने इरिक्सन की एक याचिका पर यह एंटरिम आदेश दिया है. जिसने अपने बकाये के भुगतान सुनिश्चित कराने का अनुरोध किया था. इस खबर के बाद आरकॉम के स्टॉक्स में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। स्टॉक 5 फीसदी गिरकर 26.35 रुपए पर बंद हुआ.

अनिल अंबानी अपने कर्ज को कम करने के लिए दिसंबर 2017 में अपने एसेट्स रिलायंस जियो को बेचने फैसला किया था. आरकॉम पर मार्च 2017 तक बैंकों का 45 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था. एरिक्सन ने बीते सितंबर में 1,150 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान के लिए कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया का आवेदन किया था.

यही नहीं चीन की कम्पनी 'चाइना डिवेलपमेंट बैंक' (सीडीबी) ने आरकॉम के खिलाफ 24 नवंबर को लॉ ट्राइब्यूनल में बैंकरप्सी के लिए आवेदन किया है.

खर्च कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया है. रिपोर्ट के मुताबिक इस बार छंटनी में 800-1000 कर्मचारियों को निकाला गया है. बैंकों ने रिलायंस कम्युनिकेशंस को कर्ज चुकाने के लिए दिसंबर तक मोहलत दी थी. कर्ज से जूझ रही रिलायंस कम्युनिकेशंस की कुछ दिन पहले एयरसेल के साथ डील रद्द हो गई थी.

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जियो के आयने के बाद टेलीकॉम सेक्टर लगातार संकट से जूझ रहा है. एक समारोह के मौके पर अनिल अंबानी यहां तक कह चुके हैं कि ''दूरसंचार क्षेत्र आईसीसीयू में है और इससे सरकार तथा बैंकों को जोखिम उठाना पड़ सकता है. साथ ही उन्होंने क्षेत्र में उभरते “एकाधिकार वाली बाजार” परिस्थिति को लेकर भी चेताया.

अम्बानी ने कहा, जियो के आने के बाद फ्री डेटा और वॉयस टैरिफ की प्रतिस्पर्धा से टेलिकॉम कंपनियों को बड़ा नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा कि पिछले साल टेलिकॉम सेक्टर ने 10,000 नौकरियों को ख़त्म किया जबकि इस वर्ष कम से कम 40,000 ख़त्म होने की संभावना है.

First published: 7 March 2018, 12:33 IST
 
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