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स्वीडिश कंपनी की सुप्रीम कोर्ट से मांग- अनिल अंबानी को रखें जेल में, बताई ये वजह

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 January 2019, 14:11 IST

टेलीकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनी एरिक्सन ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी दूसरी अवमानना याचिका दायर की है. इस याचिका में कहा गया है उन्हें तब तक सिविल जेल में बंद कर दिया जाए और विदेशों में यात्रा से रोक दिया जाए, जब तक कि वह स्वीडिश कंपनी के 550 करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित नहीं करते. आरकॉम ने दूरसंचार विभाग के खिलाफ शीर्ष अदालत में अवमानना कार्यवाही शुरू की, और उसे स्पेक्ट्रम बिक्री में देरी के लिए दोषी ठहराया.

अंबानी ने एरिक्सन को 550 करोड़ रुपये के जल्द भुगतान की निजी गारंटी दी थी. स्वीडिश कंपनी ने कहा कि अंबानी को देश छोड़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और गुरुवार को अदालत में उल्लेख की गई याचिका में कहा कि जब तक कि बकाया राशि को मंजूरी नहीं दी जाती, तब तक वह नागरिक जेल में अपनी हिरासत की मांग करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को ऐसी दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा.

 

स्वीडिश उपकरण निर्माता ने अदालत से आरकॉम के ऋणदाताओं को ब्याज सहित देय राशि का भुगतान करने का निर्देश देने के लिए कहा. इसने अपीलीय न्यायाधिकरण के पहले के आदेश के अनुसार, परिसंपत्तियों की आगे की बिक्री और पहले से ही पूर्ण किए गए लेन-देन के एक बदलाव पर रोक लगाने की मांग की.

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने पहले आरकॉम के खिलाफ एक इनसॉल्वेंसी याचिका दाखिल की थी. यह दूसरी बार है जब आरकॉम ने एरिक्सन का भुगतान करने में देरी की है. 30 सितंबर की पहली समय सीमा समाप्त होने के बाद स्वीडिश कंपनी ने अक्टूबर में अंबानी के खिलाफ एक अवमानना याचिका दायर की. उस समय सुप्रीम कोर्ट ने एरिक्सन को भुगतान करने के लिए आरकॉम को 15 दिसंबर तक का अधिक समय दिया था.

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First published: 4 January 2019, 14:08 IST
 
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