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अरुण जेटली: बैंक में 500 और 1000 के नोट जमा कराने पर नहीं मिलेगी कर में छूट

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 November 2016, 16:26 IST
(एजेंसी)

मोदी सरकार के वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि बैंकों में पुराने 500 और 1000 के नोट जमा कराने पर किसी तरह की ‘कर माफी’ नहीं मिलेगी और इस तरह के धन के स्रोत पर कर कानून लागू होगा.

इस मामले में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि ऊंचे मूल्य के नोटों को बैंक खातों में जमा करा कर ही नए और छोटे मूल्य के नोट हासिल किए जा सकते हैं.

जेटली ने कहा, ‘‘यह पूरी तरह से साफ है कि यह कोई माफी योजना नहीं है. इस राशि को जमा कराने पर कराधान से किसी तरह की राहत नहीं मिलेगी. ऐसे धन के स्रोत पर जरूरी कानून लागू होगा.’’

वित्त मंत्री ने कहा, "यदि यह धन कानूनी तौर पर वैध है और इससे पूर्व में बैंक से निकाला गया है या कानूनी तरीके से कमाया गया और बचाया गया है, तो चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है."

जेटली ने कहा, ‘‘लेकिन यदि यह गैरकानूनी पैसा है, तो इसके स्रोत का खुलासा करना होगा. यदि यह अपराध या रिश्वत की कमाई है, तो यह परेशानी की बात है.’’

वित्त मंत्री ने कहा, "गृहणियों और किसानों जिनकी बचत की जरूरत उचित है, उन्हें बैंक खातों में पैसा जमा कराने को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं करनी चाहिए."

वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि यदि लोग छोटी राशि मसलन 25,000 रुपये, 30,000 या 50,000 रुपये जो घर में खर्च के लिए पड़ा है उसे जमा कराना चाहते हैं तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है. वे उन पैसों को आराम से बैंकों में जमा करा सकते हैं.

जेटली ने कहा कि पहले एक या दो सप्ताह के दौरान इनके स्थान पर बदलने के लिए नए नोटों की कमी हो सकती है, लेकिन दो-तीन सप्ताह में अधिक नोटों की आपूर्ति के बाद इन्हें सामान्य तरीके से बदला जा सकेगा.

उन्होंने कहा कि इस कदम से लेनदेन अधिक से अधिक डिजिटल होगा. लोग अपनी आय का खुलासा करेंगे और कर अदा करेंगे. ‘‘देश कर अनुपालन वाला समाज बन सकेगा.’’

वित्त मंत्री ने कहा, "जिन लोगों के पास कालाधन, अपराध या रिश्वत की कमाई है उन्हें इससे झटका लगेगा. उन्होंने कहा कि यह फैसला ईमानदारी के लिए फायदे का, बेईमानी के लिए नुकसान का है.’’

जेटली ने कहा कि शुरुआत में कुछ दिन या कुछ सप्ताह लोगों को असुविधा हो सकती है. लेकिन भारत कालेधन और समानान्तर अर्थव्यवस्था पर हमेशा नहीं चल सकता.

उन्होंने कहा कि इस फैसले से अधिक से अधिक लेनदेन कर दायरे में आएगा और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर संग्रहण दोनों में इजाफा होगा. समानान्तर अर्थव्यवस्था में कमी से औपचारिक अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ेगा.

वित्त मंत्री ने कहा कि इस फैसले का कुछ असर राजनीति में भी दिखेगा. कुछ राजनीतिक चंदा अब चेकों के जरिये आना शुरू हुआ है. यदि इस कदम से कुछ सफाई हो पाती है, तो यह काफी शानदार उपाय साबित होगा.

First published: 9 November 2016, 16:26 IST
 
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