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ट्रकों की हड़ताल ने पहुंचाया देश की अर्थव्यवस्था को 50,000 करोड़ का नुकसान

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 July 2018, 13:38 IST

एसोचैम ने अपने ताजा बयान में कहा है कि देश भर में चल रही ट्रकों की देशव्यापी हड़ताल ने अर्थव्यवस्था को 50,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुंचाया है. इसलिए सरकार और ट्रांसपोर्टरों को वार्ता के जरिए संकट का समाधान करना चाहिए.

20 जुलाई से ट्रकों ने बढ़ी डीजल की कीमतों के विरोध में देश भर में सभी टोल को हटाने और थर्ड पार्टी के बीमा प्रीमियम में कमी के कारण सड़कों से करीब 90 लाख ट्रक हटा लिए थे. हालांकि इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, फिर भी अन्य क्षेत्रों पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का प्रभाव पड़ रहा है.

एसोचैम का कहना है कि सरकार को ट्रांसपोर्टरों की वास्तविक मांगों पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि उनकी परिचालन लागत अत्यधिक बढ़ रही है, हम साथ ही यूनियनों से अनुरोध करते हैं कि वे अपनी हड़ताल को बंद कर दें और पूरे उद्योग के हित में स्वीकार्य समाधान खोजने पर ध्यान दें.

यही नहीं देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ के चलते, वस्तुओं की आपूर्ति में पहले से ही परेशान बढ़ चुकी है और कीमतें बढ़ी हैं. ट्रक वालों की मांग है कि टीडीएस को खत्म कर दिया जाए. आयकर को तर्कसंगत बनाया जाये, ई-वे बिल को आसान बनाया जाये, साथ ही पर्यटकों और बसों के लिए राष्ट्रीय परमिट और प्रत्यक्ष बंदरगाह वितरण निविदा प्रणाली हटाना शामिल है.

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First published: 28 July 2018, 13:38 IST
 
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