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ऑस्ट्रेलिया के पत्रकार का दावा: अडानी डील पर की स्टोरी तो नहीं मिला भारत का वीजा

सुनील रावत | Updated on: 6 February 2018, 17:14 IST

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ग्रुप ABC की एक पत्रकार का कहना है उन्होंने भारत आने के लिए वीजा का अनुरोध किया था लेकिन अभी तक उसका कोई जवाब नहीं मिल पाया है. एबीसी पर लिखे एक लेख में भारत में जन्मी एबीसी से जुडी रिपोर्टर अमृता स्ली का कहना है कि एबीसी के रेडियो चैनल 'रेडियो नेटवर्क' पर उन्हें और उनके सहयोगियों को भारत में एक व्यापक श्रेणी के साक्षात्कार के लिए अनुदान मिला था.

जिसमें शिक्षाविदों, पत्रकारों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं सहित व्यंग्यकार और इतिहासकार टीम ने इस साल फरवरी के लिए हवाई टिकट बुक किए थे और दिसंबर में अपने वीज़ा के लिए आवेदन किया था. स्ली ने लिखा कि जब उन्होंने अपने वीज़ा की स्थिति (STATUS) का पता करने का प्रयास किया तो उन्हें एक सरकारी स्रोत ने बताया कि इसको लेकर एक समस्या थी. यह अदानी पर की गयी ABC न्यूज़ की एक स्टोरी को लेकर थी.

स्ली ने लिखा कि अब उनकी उड़ान की तारीख बीत चुकी है लेकिन टीम को अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं मिला है कि उन्हें समय पर वीजा क्यों नहीं मिला. इस बात का भी कोई जवाब नहीं मिला कि वीज़ा अनुरोध को आधिकारिक तौर पर नकार दिया गया है. 

चैनल ने किए थे बड़े खुलासे

पिछले साल अक्टूबर में एबीसी रिपोर्टर स्टीफन लांग ने अडानी ग्रुप को लेकर एक स्टोरी की थी.ऑस्ट्रेलियाई समाचार संस्था एबीसी न्यूज ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया था कि कारोबारी अडानी समूह के टैक्स हेवन देशों से संबंध हैं.

एबीसी न्यूज के विशेष कार्यक्रम फोर कॉर्नर्स के तहत की गई पड़ताल के बाद ये दावा किया गया है कि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में कई अहम परिसंपत्तियां दरअसल अडानी समूह की हैं. एबीसी न्यूज ने कहा कि अडानी समूह ने ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड की अपनी कंपनी के बारे में ऑस्ट्रेलिया सरकार को जानकारी नहीं दी.

एबीसी न्यूज की रिपोर्ट में अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी के खिलाफ भारत में चल रही जाँच का भी हवाला दिया गया है. बता दें कि अडानी समूह के पास ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड में कोयला खदानों का ठेका है.

रिपोर्ट के अनुसार अडानी समूह ने ऑस्ट्रेलिया सरकार को 22 अरब डॉलर टैक्स और राजस्व के तौर पर देने का वादा किया था. अडानी समूह से जुड़े ट्रस्टों और कंपनियों के बड़े जाल की वजह से सरकार को दिए जाने वाले टैक्स में काफी कमी हो सकती है. हालांकि अडानी समूह को अभी यह नहीं मिल पाया है.

First published: 6 February 2018, 16:59 IST
 
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