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ऑटो संकट : टाटा ट्रक से लेकर रॉयल एनफील्ड तक, अगस्त में लगा इतना बड़ा झटका

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 September 2019, 12:49 IST

मीडियम और हैवी ड्यूटी वाले वाणिज्यिक वाहनों (एम एंड एचसीवी) की बिक्री में अगस्त के महीने में बड़ी गिरावट आयी है. हालांकि बसों की बिक्री ने ज्यादा गिरवाट नहीं आयी है. जून की तिमाही में भारत जीडीपी 5 प्रतिशत रही, जो छह वर्षों में सबसे धीमी थी. विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति भी खराब है, जो 0.6 प्रतिशत रही. ऑटो सेक्टर की बात करें तो भारत के शीर्ष चार एम एंड एचसीवी निर्माताओं - टाटा मोटर्स, अशोक लीलैंड, वोल्वो आयशर, और महिंद्रा एंड महिंद्रा की बिक्री की बात करें तो एक साल पहले की तुलना में यह 59.5 प्रतिशत घटकर 31,067 इकाई रह गई.

हताशा में ट्रक निर्माता उच्च-टन भार (49 टन से ऊपर) ड्यूटी ट्रकों पर 9,00,000 रुपये तक की छूट दे रहे हैं. कंपनियां अब त्योहारी सीजन और BSVI उत्सर्जन मानदंडों के कार्यान्वयन से पहले कंपनियां इन वाहनों को बेच देना चाहती है, जो 1 अप्रैल, 2020 को प्रभावी हो रही है. इस दौरान मार्केट लीडर, टाटा मोटर्स, ने भारी शुल्क वाले ट्रकों में 58 प्रतिशत से 5,340 इकाइयों की साल-दर-साल गिरावट देखी, अशोक लीलैंड में उच्च टन वाले ट्रकों की बिक्री 70 प्रतिशत घटकर 3,336 इकाई रह गई.

 

दोपहिया वाहनों की संख्या में भी आयी गिरावट

दुनिया के सबसे बड़े बाजार भारत में दोपहिया वाहनों की बिक्री में पिछले महीनों में गिरावट आई है. सबसे बड़े दोपहिया वाहन निर्माता हीरो मोटो कॉर्प ने इस दौरान 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी. कंपनी ने दो-पहिया वाहनों पर जीएसटी में कटौती की मांग की थी, कहा था कि इसके बिना मांग को पुनर्जीवित करना कठिन है.

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के निदेशक अंतरराष्ट्रीय निकुंज सांघी ने कहा, इन्वेंटरी अभी भी उच्च स्तर पर है, पूछताछ अभी भी मांग में तब्दील नहीं हो रही है. इसी तरह रॉयल एनफील्ड की बिक्री में 23 फीसदी की गिरावट आयी है. जबकि बजाज और टीवीएस की बिक्री में 13 और 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखि गई.

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First published: 4 September 2019, 12:46 IST
 
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