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अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने का संकेत है ऑटो उद्योग में बेहतरी

नीरज ठाकुर | Updated on: 6 May 2016, 22:26 IST

इस सप्ताह जारी मैक्रो इकॉनमी इंडीकेटर्स के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था फिर से सुधर रही है. यात्री वाहनों की बिक्री ने अप्रैल में दो अंकों में बढ़ोत्तरी हासिल की है. मारुति सुजूकी, ह्युंदे, रेनॉ और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों की बिक्री में तेजी दिखी. भारत के पांच शीर्ष ऑटोमोबाइल निर्माताओं को छह माह में सर्वाधिक 16 फीसदी उछाल देखने को मिला.

इतना ही नहीं, दोपहिया वाहनों की भी मांग में इजाफा हुआ है. जहां हीरो मोटोकॉर्प की बिक्री में 14.89 फीसदी की दर से वृद्धि हुई, वहीं, होण्डा मोटरसाइकिल्स और स्कूटर्स ने 25.83 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की.

आर्थिक प्रदर्शन के अन्य सूचकांक यानी कोर सेक्टर के आंकड़ों ने भी मार्च में फिर से सुधार के संकेत दिए हैं.

रिफाइनरी उत्पादों, फर्टिलाइजर्स, सीमेंट और इलेक्ट्रिसिटी में दो अंकों की विकास दर के चलते आठ महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों का संयुक्त प्रदर्शन 16 माह में सर्वाधिक 6.4 फीसदी रहा.

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कहानी यहीं खत्म नहीं होती. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की 76 फर्मों के मिंट सर्वे में पता चला कि अप्रैल से जून 2014 के बीच इन कंपनियों की सकल बिक्री सबसे तेजी से बढ़ते हुए बीते वर्ष की तुलना में 6.8 फीसदी बढ़ी.

द बिजनेस स्टैंडर्ड द्वारा 190 सूचीबद्ध कंपनियों के सर्वे में खुलासा हुआ कि इनकी सकल बिक्री में 5.1 फीसदी और लाभ में 9.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

अतीत के चलते निराशा

अगर बाहर से देखें तो यह सभी आंकड़े बेहतर भविष्य की उम्मीद करने का अच्छा कारण बन सकती हैं. लेकिन दुर्भाग्यवश अभी से खुशियां मनाना जल्दबाजी हो जाएगा. इससे पहले भी उम्मीद की किरणें दिखाई दी थीं लेकिन उनका नतीजा कुछ भी नहीं निकला.

बीते दो वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई सकारात्मक संकेत देखे हैं. उदाहरण के लिए मई 2015 में कोर सेक्टर ने 4.4 फीसदी की बढ़ोतरी देखी. यह बीते छह माह में सर्वाधिक तेजी से होने वाली बढ़ोतरी थी. 

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लेकिन इसके बाद अर्थव्यवस्था की तेजी थमी और जून व जुलाई में यह आंकड़े कम होकर क्रमशः 3 फीसदी और 1.1 फीसदी पर आ गए. नवंबर 2015 तक स्टील उत्पादन में आई कमी के चलते कोर सेक्टर 1.3 फीसदी पर पहुंच गया.

इसी तरह 2015 में दो अंकों की विकास दर पाने के बाद वाहन बिक्री में जबर्दस्त कमी आई. अक्तूबर 2015 में ऑटोमोबाइल की बिक्री 14 फीसदी तक पहुंची लेकिन बंपर बिक्री के त्योहारी माह के अगले महीने नवंबर में यह केवल 3.18 फीसदी ही रही.

दूसरा तथ्य निक्की मार्केट मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) की धीमी बढ़ोत्तरी है, जो अर्थव्यवस्था के हकीकत में सुधार पर संदेह पैदा करता है. मार्च में 52.4 की तुलना में पीएमआई अप्रैल में कम होकर 50.5 पर पहुंच गई.

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पीएमआई में कमी का कारण कमजोर मांग थी. इसने कंपनियों पर आउटपुट कम करने का दबाव डाला. जहां भारत के विकास की संभावनाओं को केवल पीएमआई के आधार पर तय करना सही नहीं होगा, तो इसकी पूर्णतया अनदेखी भी गलत होगी.

विशेषज्ञों की राय

पीडब्लूसी इंडिया के साझेदार और आटो उद्योग के विश्लेषक अब्दुल मजीद के मुताबिक, "ऑटो बिक्री में बढ़त लोगों के बीच बढ़ी हुई उम्मीदें दिखाता है. बढ़ी हुई नगदी के कारण ब्याज दरों में कमी आना शुरू हो गई और बैंक ज्यादा उधार देने को तैयार थीं."

वो कहते हैं, "केंद्रीय बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी आवंटन किया गया है. इसके परिणामस्वरूप लोग शोरूम में जाकर वाहन खरीद रहे थे. लेकिन यह केवल अच्छे मानसून पर ही निर्भर होता है. अगर मानसून खराब रहा तो यह पूरी सकारात्मक भावना चली जाएगी."

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रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी भी यही मानते हैं, "ताजा आंकड़े मानसून से बढ़ी हुई उम्मीदों का नतीजा हैं. अगर मानसून अच्छा रहा तो हमें अर्थव्यवस्था में पूर्ण सुधार दिखेगा क्योंकि लोगों के हाथ में ज्यादा पैसे होंगे और वे उन्हें खर्च करना चाहेंगे. इसलिए हमें मानसून का इंतजार करना होगा ताकि देश में वास्तविक आर्थिक बहाली की घोषणा हो सके."

First published: 6 May 2016, 22:26 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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