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चेन्नई बाढ़: पटरी से उतर सकती है देश की अर्थव्यवस्था

नीरज ठाकुर | Updated on: 8 December 2015, 16:14 IST
QUICK PILL
  • भारत के सालाना 38 अरब डॉलर के ऑटोमोबाइल प्रोडक्शन में 25 फीसदी हिस्सेदारी चेन्नई के आस-पास मौजूद कंपनियों की है. ऐसे में एक दिन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में काम नहीं होने से इंडस्ट्री को करीब 180 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.
  • दिल्ली में रेनॉ के डीलरों ने अपने कस्टमर्स को लंबे वेटिंग पीरियड के बारे में आगाह करना शुरू कर दिया है. वहीं देश की दूसरी बड़ी कार कंपनी हुंडई को हर दिन 1,800 कारों के प्रॉडक्शन का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

चेन्नई बाढ़ की विभीषिका से निपटने में जुटा हुआ है. बाढ़ ने जिस बड़े पैमाने पर वहां तबाही मचाई है उसके मानवीय और आर्थिक नुकसान की कहानी धीरे-धीरे सामने आने लगी है. मजदूरों, छोटे कारोबारियों और असंगठित क्षेत्र को हुए नुकसान के बारे में तो अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता.

रही बात संगठित क्षेत्र की उसमें सबसे ज्यादा झटका ऑटोमोबाइल उद्योग को लगा है. चेन्नई और उसके आस-पास का इलाका ऑटोमोबाइल कंपनियों का हब रहा है. चेन्नई में भारत के सालाना 38 अरब डॉलर के प्रोडक्शन में 25 फीसदी की हिस्सेदारी है. ऐसे में एक दिन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में काम नहीं होने से इंडस्ट्री को करीब 180 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है.

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऑटो इंडस्ट्री की भागीदारी 40 फीसदी से अधिक है. चेन्नई की तबाही से निश्चित तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है.

प्रोडक्शन में गिरावट

जहां तक आंकड़ों की बात है तो भारत ने 2014-15 में 35 लाख वाहनों का निर्यात किया. पिछले साल के मुकाबले यह आंकड़ा 15 फीसदी अधिक है. 

चेन्नई में आई बाढ़ से निश्चित तौर पर इस आंकड़े में गिरावट आएगी. चूंकि उत्पादन अभी ठप पड़ चुका है इसलिए आने वाले दिनों में कारों और मोटरसाइकिलों के वेटिंग पीरियड में बढ़ोतरी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. अगर आप नए साल की शुरुआत में रॉयल एनफील्ड की डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं तो आपको निराशा हाथ लगेगी.

कंपनी हर महीने 40,000 बाइक की बिक्री करती है और नवंबर महीने में उसे 4,000 यूनिट का नुकसान उठाना पड़ा. वहीं दिसंबर महीने के पहले सात दिनों में कंपनी एक भी बाइक नहीं बना पाई. रॉयल एनफील्ड सबसे ज्यादा क्लासिक 350 मॉडल की बिक्री करती है और इसके लिए 2-4 महीने का इंतजार करना पड़ता है. वह भी तब जब चेन्नई का संयंत्र पूरी क्षमता से काम कर रहा होता है. ऐसे में आप इस बात का आसानी से अंदाज लगा सकते हैं कि वेटिंग पीरियड में एक महीने से ज्यादा की बढ़ोतरी होने जा रही है.

संगठित क्षेत्र में चेन्नई की बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को हुआ है

रॉयल एनफील्ड के प्रवक्ता ने बताया, 'हम फिलहाल यह बताने की हालत में नहीं है कि हमारे ग्राहकों को डिलीवरी के लिए और कितना इंतजार करना पड़ेगा. लेकिन निश्चित तौर पर यह सामान्य वेटिंग पीरियड से ज्यादा होगा. चेन्नई का हमारा प्लांट एक दिसंबर से बंद है.'

कंपनी जिसे सबसे ज्यादा नुकसान होगा

रॉयल एनफील्ड के अलावा जिन अन्य कंपनियों को बाढ़ से नुकसान उठाना होगा उसमें फोर्ड, हुंडई, रेनॉ निसान, डेमलर इंडिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा शामिल है. ये कंपनियां या तो चेन्नई में प्रोडक्शन करती हैं या फिर वहां के वेंडर से खरीदारी करती हैं.

सबसे ज्यादा असर हाल में लॉन्च हुए मॉडल पर पड़ेगा. रेनॉ इंडिया की छोटी कार क्विड के लिए ग्राहकों को 10 महीने से अधिक का इंतजार करना पड़ सकता है. अभी तक इस कार की 70,000 से अधिक बुकिंग हो चुकी है लेकिन कंपनी बाढ़ के पहले तक महज 6,000 कारों की ही डिलीवरी कर पाई है. 

दिल्ली में रेनॉ के डीलरों ने अपने कस्टमर्स को लंबे वेटिंग पीरियड के बारे में आगाह करना शुरू कर दिया है. वहीं देश की दूसरी बड़ी कार कंपनी हुंडई को हर दिन 1,800 कारों के प्रॉडक्शन का नुकसान उठाना पड़ रहा है. चेन्नई में कंपनी के दो प्लांट है जिसकी सालाना क्षमता 6.8 लाख कार है.

हालांकि ऐसा भी नहीं है कि चेन्नई की बाढ़ का असर केवल ग्राहकों पर ही पड़ेगा. देश भर में फैले इन कंपनियों के सर्विस सेंटर्स भी अपने कस्टमर्स को ऑटो पार्ट्स की डिलीवरी नहीं कर पा रहे हैं.

दक्षिण दिल्ली के फोर्ड सर्विस सेंटर के एक अधिकारी ने कैच को बताया, 'चेन्नई में कोई भी कॉल रिसीव नहीं कर रहा है. हम स्पेयर पार्ट्स की कमी से जूझ रहे हैं. हम पुराने स्टॉक से काम चला रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे पार्ट्स हैं जो उपलब्ध नहीं है. आने वाले दिनों में कारों की सर्विसिंग में बड़ी परेशानी होने जा रही है.'

वित्तीय नुकसान

हालांकि कोई भी कंपनी आधिकारिक तौर पर बाढ़ से हुए आर्थिक नुकसान के बारे में बात करने को तैयार नहीं है. लेकिन निजी तौर पर वह इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि नुकसान बहुत बड़ा होगा.

प्राइसवाटरहाउस कूपर्स में ऑटो एक्सपर्ट अब्दुल मजीद बताते हैं, 'सभी बड़ी इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स के लिए चेन्नइ बड़ा हब रहा है. इसलिए अगर किसी कंपनी का चेन्नई में प्लांट नहीं भी है तो भी उसे चेन्नई के वेंडर्स से कुछ न कुछ खरीदना ही पड़ता है. इससे भारत के ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट पर भी असर होगा.'

एक ऑटोमोबाइल कंपनी के बड़े अधिकारी ने बताया कि चेन्नई बाढ़ का असर कई महीनों तक दिखेगा क्योंकि बाढ़ से कई प्लांट्स को नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा, 'इक्विपमेंट की रिपेयरिंग की जा सकती है लेकिन प्रॉडक्शन की रफ्तार वापस लाने में काफी समय लग जाएगा.'

First published: 8 December 2015, 20:46 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

As a financial journalist, his interface with the two dominant 'isms'- Marxism and Capitalism- has made him realise that an ideal economic order of the world would lie somewhere between the two. Associate Editor at Catch, Neeraj writes on everything related to business and the economy. He has been associated with Businessworld, DNA and Business Standard in the past. When not thinking about stories, he is busy playing with his pet dog, watching old Hindi movies or searching through the Vividh Bharti station on his Philips radio transistor.

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