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जॉनसन एंड जॉनसन के बाद इन दो बड़ी कंपनियों के बेबी पाउडर आये जांच के घेरे में

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 January 2019, 15:12 IST

जॉनसन एंड जॉनसन के बाद अब हिमालय और चिक्को सहित शिशु देखभाल के उत्पादों जांच के घेरे में आ गए हैं. इसके तहत ड्रग रेगुलेटर ने विभिन्न टैल्कम पाउडर, साबुन, शैंपू और अन्य शिशु उत्पादों के 200 से अधिक नमूने जब्त किये हैं. हालांकि इस जांच का मुख्य ध्यान यह पता लगाना है कि बाजार में सभी टैल्कम पाउडर ब्रांड सुरक्षित है या नहीं या इनमे एस्बेस्टोस की मात्रा है कि नहीं.

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) जो देश का शीर्ष दवा नियामक है, ने टैल्कम पाउडर के लगभग 150 नमूने और अन्य शिशु देखभाल उत्पादों जैसे बेबी शैम्पू, क्रीम, लोशन और साबुन के लगभग 50 नमूने एकत्र किए हैं. तैयार उत्पादों के नमूनों के अलावा नियामक ने इन उत्पादों को बनाने में उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल लगभग 14 नमूने एकत्र किए हैं.

सभी नमूनों को परीक्षण सौंदर्य प्रसाधन में विशेषज्ञता के साथ केंद्रीय परीक्षण प्रयोगशाला में से एक में परीक्षण के लिए भेजा गया है.

एक रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने कहा कि "हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि न केवल जम्मू और कश्मीर बल्कि देश के अन्य बाजारों में उपलब्ध सभी शिशु उत्पाद सुरक्षित और अभ्रक मुक्त हों. इसलिए निरीक्षण के दौरान जम्मू-कश्मीर से नमूने एकत्र करने के बाद हमने शिशु उत्पादों के अन्य ब्रांडों के नमूनों का भी परीक्षण करने का फैसला किया है.“ इन नमूनों की परीक्षण रिपोर्ट अगले 15 दिनों के भीतर आने की संभावना है.

इससे पहले दिसंबर में दवा नियामक ने बद्दी और मुंबई में जम्मू-कश्मीर के कारखानों पर छापे मारे थे और अमेरिका में रिपोर्ट के बाद तैयार उत्पादों और कच्चे माल के नमूने एकत्र किए थे, जिसमें कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर के पाउडर में कैंसर पैदा करने वाला" एस्बेस्टस है और यह यह 1971 के बाद से अमेरिकी कंपनियों को पता है. जुलाई में मिसौरी की एक अदालत ने जम्मू-कश्मीर को 4.7 बिलियन डॉलर का मुआवजा देने का आदेश दिया था.

अमेरिका में 22 महिलाओं ने दावा किया था कि इनके पाउडर में एस्बेस्टस होने से उन्हें ओवेरियन कैंसर हो गया था. वर्तमान में, कंपनी टेल्क पाउडर युक्त बॉडी पाउडर पर 9,000 से अधिक मामलों का सामना कर रही है और लगातार इस बात से इनकार किया है कि इसके उत्पाद खतरनाक हैं या इनमें एस्बेस्टस हैं.

First published: 1 January 2019, 15:08 IST
 
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