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100 से ज्यादा देसी प्रोजेक्ट में विदेशी निवेश को मंजूरी देगी मोदी सरकार

समीर चौगांवकर | Updated on: 10 January 2016, 8:46 IST
QUICK PILL
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर पीएमओ जल्द ही लगभग 25 लाख करोड़ रुपए की लंबित परियोजनाओं को मंजूरी दे सकता है.
  • वित्त मंत्रालय को ऐसी परियोजनाओं की सूची तैयार करने को कहा गया है जिन्हें विदेशी सरकारों को आॅफर किया जा सकता है.

बिहार की हार के बाद परेशान चल रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब विकास के एजेंडे को नए साल में नए तरीके से गति देने का मन बनाया है.

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंत्रालयों से विभिन्न परियोजनाओं की सूची मांगी है. साथ ही मंत्रालयों को अपने प्रोजेक्ट्स में तेजी लाने के लिए अपनाए जाने वाले निर्णयों एवं प्रक्रियाओं से पीएमओ को अवगत कराने के लिए कहा है.

खासतौर पर सड़क परिवहन, उर्जा और रेलवे को हिदायत देते हुए कहा गया है कि बड़ी परियोजनाओं में आ रही दिक्कतों से तत्काल पीएमओ को अवगत कराया जाए. पीएमओ अब समस्या का समाधान निकाल कर परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाना चाहता है.

उल्लेखनीय है कि पिछले 15 महीने में मोदी सरकार ने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप के जरिए दो लाख करोड़ की 100 से ज्यादा लंबित परियोजनाओं को हरी झंडी दी है. इनमें हाईवे प्रोजेक्ट्स ज्यादा है.

सूत्र बताते हैं कि पीएम मोदी द्वारा परियोजनाओं को जल्द स्वीकृत करने के लिए मंत्रालयों को सिंगल विंडो क्लियरेंस अपनाने की सलाह दी गई. जिसके बाद लंबित परियोजनाओं की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है.

लंबित परियोजनाओं और अनुमति मिलने में आ रही देरी से निवेशकों का केंद्र सरकार पर भरोसा कम हो रहा है. पीएमओ ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में इस बात को महसूस किया कि देश में निवेश का माहौल अभी भी कमजोर है.

इसी वजह से पीएमओ ने पच्चीस लाख करोड़ से ज्यादा लागत वाली करीब 400 परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का मन बना लिया है.

पीएम मोदी अब मंहगी और महत्वपूर्ण परियोजनाओं को विदेशी सरकारों को आॅफर करने की तैयारी में है.

पीएम से मिले निर्देशों के बाद सक्रिय हुए उनके कार्यालय ने वित्त मंत्रालय को ऐसी परियोजनाओं की सूची तैयार करने को कहा है जिन्हें विदेशी सरकारों को आॅफर किया जा सकता है. इसके बाद वित्त मंत्रालय प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ मिलकर इस सूची को अंतिम रूप देगा.

गौरतलब है कि इससे पहले मनमोहन सिंह सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर और आधारभूत परियोजनाओं को गति देने के मकसद से प्रोजेक्ट्स मॉनिटरिंग ग्रुप बनाया था. मोदी सरकार भी उसी तर्ज पर इसे आगे बढ़ाने की तैयारी में है.

चीन-जापान का साथ

सूत्र बताते हैं कि सरकार इस सूची में लंबे समय से लंबित पड़ी योजनाओं के साथ ही नई  परियोजनाओं को भी शामिल करेगी. इसमें लंबे समय के लिए कम ब्याज दर पर वित्तीय मदद की दरकार होगी. चीन और जापान ने अगले पांच सालों में 55 अरब डॅालर निवेश करने का भरोसा भारत को दिया है.

कम ब्याज दर पर एफडीआई के जरिए लंबित परियोजनाओं को पूरा करने की कोशिश में सरकार

इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने 78 अरब डॉलर, साउथ कोरिया-ऑस्ट्रेलिया ने 10 अरब डॉलर और रूस ने 20 अरब डॉलर निवेश का वादा किया है. मोदी सरकार खुद कुछ परियोजनाओं को चिन्हित कर विदेशी निवेशकों को सौंपने वाली है.

सरकार को लग रहा है कि इससे भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को गति मिल सकेगी. वित्तीय वर्ष 2014 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 36.39 अरब डॅालर था जो वित्तीय वर्ष 2015 में 23 फीसदी बढकर 44.88 अरब डॅालर हो गया.

सरकार इस लिस्ट में प्राइवेट कंपनियों के प्रोजेक्ट्स को भी जगह दे सकती हैं. यूपीए सरकार के दौरान प्रोजेक्ट्स मॉनिटरिंग ग्रुप की बनी थी. इस ग्रुप ने तकरीबन 10 लाख करोड़ के निवेश के 314 प्रोजेक्ट्स से जुड़ी बाधाओं को दूर करने की पहल की थी. सरकार इन परियोजनाओं को भी इसमें शामिल कर सकती है.

जमीन की कीमत को हटा सकती है सरकार

रुकी हुई परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार परियोजनाओं की कुल लागत में से जमीन की कीमत को हटा सकती है. ऐसा करने पर कई परियोजनाओं को मंत्रालय के स्तर पर ही अनुमति मिल सकेगी. इस कदम से परियोजनाओं को कैबिनेट कमेटी आॅन इकॉनामिक अफेयर्स के पास अनुमति के लिए भेजने की जरूरत नहीं होगी.

केंद्र सरकार यदि परियोजनाओं में जमीन की कीमत हटाने के नियम को बदल देती हैं तो इसका सबसे ज्यादा फायदा सड़क परिवहन मंत्रालय, रेलवे, उर्जा और शहरी विकास मंत्रालय को होगा.

सरकार इस बात को महसूस कर रही है कि सिर्फ जमीन कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी के कारण कई कम कीमत के परियोजनाओं की लागत बढ़ रही है. जिसके कारण इसे अनुमति के लिए कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजना पड़ता है.

First published: 10 January 2016, 8:46 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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