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RBI का खुलासा: एक दशक में राइटऑफ किये गए कर्ज का 80 फीसदी मोदी सरकार में

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 April 2019, 10:23 IST

एनपीए का सामना कर रहे बैंकों में सरकार ने करदाताओं का पैसा डालकर उन्हें उबारने की कोशिश की लेकन भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों की माने तो दिसंबर 2018 को समाप्त नौ महीने के दौरान 1,56,702 करोड़ रु का कुल लोन राइटऑफ़ किया गया. इस तरह 10 साल में बैंकों ने कुल 7,00,000 करोड़ से अधिक का लोन राइटऑफ़ किया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 साल में राइटऑफ़ किये गए कुल लोन का 80 फीसदी बीते पांच साल में यानी साल 2014 के बाद किया गया.

द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा दायर एक आवेदन के जवाब में आरबीआई ने यह खुलासा किया कि अप्रैल 2014 के बाद 5,55,603 करोड़ रुपये का लोन राइट ऑफ़ किया गया. बैड लोन को कम दिखाने के लिए उत्सुक बैंकों ने 2016-17 में 1,08,374 करोड़ रुपये और 2017-18 में 161,328 करोड़ रुपये का लोन राइट ऑफ़ किया. 2018-19 के पहले छह महीनों में बैंकों ने 82,799 करोड़ रुपये का लोन राइटऑफ़ किया. अक्टूबर-दिसंबर 2018 तिमाही में राइटऑफ की मात्रा 64,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

 

बैंकिंग सूत्रों ने कहा कि उधारकर्ताओं की पहचान और व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के मामले में राइटऑफ़ की गई राशि के बारे में बहुत कम जानकारी है. जबकि बैंकों का दावा है कि ऋणों राइटऑफ़ किये जाने के बाद भी वसूली के उपाय जारी हैं. सूत्रों ने कहा कि अभी 15-20 प्रतिशत से अधिक की वसूली नहीं हुई है और हर साल राइटऑफ के आंकड़े बढ़ रहे हैं.

सरकार ने पिछले साल बैंकों के बेल आउट के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये के पुनर्पूंजीकरण कार्यक्रम की घोषणा की थी जो अब 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक एनपीए के साथ फंसे हुए हैं. बैंक यूनियन लंबे समय से सरकार से डिफॉल्टरों के नाम सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं. यह साफ़ है कि बैड लोन के लिए अधिकतर बड़े कारोबारी जिम्मेदार हैं.

First published: 13 April 2019, 10:06 IST
 
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