Home » बिज़नेस » Bank deposit growth fell to a five-decade low in fiscal year ended March 2018
 

नोटबंदी के बाद बैंकों के डिपॉज़िट में रिकॉर्ड गिरावट, 55 साल के निम्न स्तर पर पहुंचा

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 May 2018, 18:42 IST

भारतीय रिजर्व बैंक की माने तो मार्च 2018 को खत्म हुए वित्त वर्ष में बैंकों में महज 6.7 फीसदी की दर से लोगों ने पैसे जमा किये, जो 1963 के बाद सबसे कम है. गौरतलब है कि नोटबंदी के दौरान बड़ी मात्रा में बैंकों में पैसे जमा हुए थे. नोटबंदी के बाद सरकार ने बड़ी मात्रा में नोटों की छपाई का काम किया और लोगों ने उतनी ही तेजी से कैश की निकासी भी की.

आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि 2017-18 में बैंकों में केवल 114 लाख करोड़ रुपये जमा हुए. जबकि इसी दौरान म्यूचुअल फंड में 21.36 लाख करोड़ रुपये जमा हुए. आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि लोगों ने इन्श्योरेंस कंपनियों से 193 लाख करोड़ रुपये की पॉलिसी खरीदी. आरबीआई के मुताबिक नोटबंदी के बाद बैंक में एफडी खाता खुलवाने वालों की संख्या में काफी इजाफा देखा गया था.

हालांकि एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या लोगों का बैंकों पर भरोसा डगमगा रहा है.क्योंकि  नोटबंदी के बाद लोगों ने बैंकों से बड़ी मात्रा में पैसे विद्ड्रॉ किये. नोटबंदी के बाद बैंकों ने पुराने नोटों में आई कुल डिपोजिट को 15.28 लाख करोड़ बताया था.

इससे मार्च 2017 को खत्म हुए वित्त वर्ष तक बैंकों के पास कुल जमा राश‍ि 108 लाख करोड़ पर पहुंच गई. वहीं, मार्च 2018 तक कुल रकम 117 लाख करोड़ थी. इस दौरान बैंकों में रकम जमा होने की दर 6.7 फीसदी रही.

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First published: 4 May 2018, 18:40 IST
 
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