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निजीकरण और विलय के विरोध में 8 लाख बैंककर्मियों की हड़ताल से समस्या

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 July 2016, 14:44 IST
(पत्रिका)

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के सहायक बैंकों के विलय और बैंकिंग सुधार के विरोध में सॉर्वजनिक बैंकों के कर्मचारी शुक्रवार को हड़ताल पर हैं, जिससे सामान्य बैंकिंग कामकाज पर तक असर पड़ा.

26 जुलाई को बैंकों के यूनियन और सरकार के बीच हुई बैठक में कोई नतीजा नहीं निकलने के बाद हड़ताल का फैसला लिया गया था.

बैंक यूनियन सरकार द्वारा स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (एसबीबीजे), स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर (एसबीटी), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (एसबीपी), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (एसबीएम) और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (एसबीएच) के एसबीआई में विलय के खिलाफ हैं.

नौ बैकों के कर्मचारी और ऑफिसर्स यूनियनों के प्रमुख संगठन यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियंस (यूएफबीयू) ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया, जिससे चेक समाशोधन, नगद जमा और निकासी तथा अन्य सेवाएं प्रभावित होने के आसार हैं. यूएफबीयू 8 लाख बैंककर्मियों का प्रतिनिधित्व करता है.

एसबीआई सहित ज्यादातर बैंकों ने ग्राहकों को सूचित कर दिया है कि 29 जुलाई को हड़ताल की वजह से सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.

एसबीआई ने बयान में कहा कि ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन तथा ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन यूएफबीयू के सदस्य हैं. ऐसे में हड़ताल की वजह से बैंक का कामकाज भी प्रभावित होगा.

ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि 26 जुलाई को चीफ लेबर कमीशन के साथ हुई बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला. यदि कमीशन उनकी मांगों पर विचार करती और उन्हें पूरा करती तो यूएफबीयू हड़ताल के आह्वान पर पुनर्विचार के लिए तैयार था.

उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन अर्थपूर्ण चर्चा के लिए तैयार थे लेकिन सरकार ने सिर्फ बैंकिंग सुधार पर अपने मौजूदा नीतिगत फैसले को उचित ठहराने की कोशिश की. इसलिए कोई बात नहीं बन पाई.

हड़ताल की अपील में शामिल नेशनल ऑर्गनाइजेशन आफ बैंक वर्कर्स के उपाध्यक्ष अश्वनी राणा ने कहा कि सरकार इन बैंकों की 100 प्रतिशत मालिक नहीं है. लोगों के शेयर भी इनमें हैं इस लिए सरकार कोई निर्णय अपने आप नहीं कर सकती. हमारी मांग है कि सरकार को सभी पक्षों से बात करनी चाहिए और उसके बाद ही कोई निर्णय लेना चहिए.

First published: 30 July 2016, 14:44 IST
 
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