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माल्या का प्रस्ताव मानने में बैंकों की भलाई

नीरज ठाकुर | Updated on: 1 April 2016, 12:32 IST
QUICK PILL
  • विजय माल्या ने बैंकों को सितंबर 2016 तक 4,000 करोड़ रुपये चुकाने का प्रस्ताव दिया है. 17 बैंकों के समूह का माल्या पर करीब 9,000 करोड़ रुपये बकाया है लेकिन इसमें से 3,000 करोड़ रुपये ब्याज की रकम है.
  • बैंक अगर माल्या का प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हैं तो उन्हें माल्या को दिए गए मूल कर्ज का 66 फीसदी रकम वसूलने में मदद मिलेगी. वैसे भी माल्या की जब्त संपत्ति को अभी तक कोई खरीदार नहीं मिल पाया है.

विजय माल्या ने बैंकों को उनका कर्ज चुकाने का प्रस्ताव दिया है. यह अच्छी खबर है. माल्या ने इस साल सितंबर महीने तक 17 बैंकों को 4,000 करोड़ रुपये चुकाने का प्रस्ताव दिया है. माल्या डिफॉल्ट के इस बहुचर्चित मामले को बंद करने के पक्ष में हैं.

अब सवाल यह है कि क्या बैंकों को इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में माल्या के खिलाफ दायर मुकदमों को वापस ले लेना चाहिए ताकि माल्या की भारत वापसी का रास्ता साफ हो सके? या फिर उन्हें कुल 9,000 करोड़ रुपये की रकम वसूलने तक अपनी लड़ाई जारी रखनी चाहिए?

विजय माल्या ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की मदद से बैंकों को यह प्रस्ताव दिया. टीवी चैनलों और आलोचकों ने इस प्रस्ताव को नहीं मानने की सलाह दी. उनका कहना था कि बैंकों को पूरी रकम से कम पर समझौता नहीं करना चाहिए.

बेशक इस मामले में टीवी एंकर ड्रामा कर सकते हैं लेकिन जो फाइनेंस की दुनिया और बैंकिंग को समझतेे हैं उनके लिए यह एक बेहतर डील है और बैंकों को इस मामलेे में काम करना चाहिए.

माल्या का प्रस्ताव बेहतर ऑफर

माल्या पर बैंकों का मूल कर्ज करीब 6,000 करोड़ रुपये है. माल्या पर फिलहाल 9,000 करोड़ रुपये का कर्ज है जिसमें 3,000 करोड़ रुपये की रकम ब्याज की राशि है.

इसलिए अगर बैंक माल्या से 4,000 करोड़ रुपये लेने पर सहमत हो जाते हैं तो वह माल्या से मूलधन का करीब 66 फीसदी वसूलने में सफल होंगे. रिजर्व बैंक के प्रॉविजनिंग प्रावधानोें मेंं बैंकों को भविष्य में होने वाले किसी घाटे से बचने के लिए एक निश्चित रकम की जरूरत होती है. 

इसलिए मौजूदा सौदे के मुताबिक माल्या को दिए गए कर्ज पर चढ़ी ब्याज की रकम को गिनना सही नहीं होगा.

क्या है उपाय?

अगर कोई बैंक किसी कर्जदाता से कर्ज वसूलने में विफल रहता है तो वह उस कर्ज को एआरसी (एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी) को बेच देते हैं. एआरसी बैंकों से कम कीमत पर उनके एनपीए की खरीदारी करती हैं और फिर उस कर्ज को वसूल कर मुनाफा कमाती हैं.

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस के मुताबिक, एआरसी 10-40 फीसदी की छूट पर बैंकों से एनपीए की खरीदारी करती हैं. खराब कर्ज की गणना वसूली की संभावना और गिरवी रखी गई संपत्ति की कीमत सेे तय होती है.

मुंबई में किंगफिशर एयरलाइंस के हेड ऑफिस को हालिया नीलामी में कोई खरीदार नहीं मिला है

माल्या के मामले में गिरवी रखी गई संपत्ति की कीमत बेहद कम है. किंगफिशर एयरलाइंस अब बंद हो चुकी है. किंगफिशर एयरलाइंस के लोगो की कीमत बहुत अधिक बताई जा चुकी है और आज की तारीख में बाजार में इसका कोई खरीदार नहीं है. 

वहीं मुंबई में किंगफिशर एयरलाइंस के हेड ऑफिस को हालिया नीलामी में कोई खरीदार नहीं मिला है.

तो इसका मतलब यह हुआ कि अगर माल्या मूल कर्ज का 66 फीसदी चुकाने के लिए तैयार हैं तो बैंकों के पास इससे बेहतर विकल्प कुछ और नहीं है.

कुछ लोगों का कहना है कि एनपीए की दुनिया में माल्या की हैसियत मामूली है और अगर सरकार उन्हें इस तरह की रियायत देगी तो दूसरे बड़े विलफुल डिफॉल्टर्स से कर्ज वसूलने में मुश्किलें होंगी.

लेकिन इस तर्क का कोई मतलब नहीं है. माल्या का मामला केवल विलफुल डिफॉल्टर्स का नहीं बल्कि दीवालिया होने का भी है. 

फिलहाल बैंकिंग सेक्टर का कुल एनपीए करीब 4 लाख करोड़ रुपये है. अगर हम इसमें नहीं शामिल किए गए एनपीए और पुनर्गठित कर्ज की रकम जोड़ देे तो यह रकम 10 लाख करोड़ रुपये के आस-पास होगी.

तो अगर हम कुल एनपीए को 10 लाख करोड़ रुपये मान ले तो पूरा का पूरा एनपीए दीवालिया हो चुके कारोबार से संबंधित नहीं होगा. अधिकांश एनपीए उन कंपनियों के खाते में जाएगा जो संबंधित सेक्टर की खराब स्थिति की वजह से कर्ज नहीं चुका पाए. 

ऐसी कंपनियां न केवल कर्ज चुकाने को तैयार रहती हैं बल्कि बैंकों के लिए इसने कर्ज वसूलना ज्यादा आसान होता है क्येांकि उनके पास परिसंपत्तियों को जब्त करने का विकल्प मौजूद रहता है.

मसलन अगर रिलायंस, एस्सार या वेदांत जैसी कंपनियां सर्वाधिक कर्ज में रहने वाली कंपनी हैं. अगर यह सभी कंपनियां कर्ज चुकाने में विफल हो जाती हैं तो बैंक सीधे इनकी संपत्तियों को जब्त कर बाजार में बेच सकते हैं.

हालांकि इस बीच सीबीआई और ईडी की जांच जारी रहनी चाहिए. सीबीआई की मौजूदा जांच के मुताबिक आईडीबीआई बैंक ने खराब क्रेडिट रैंकिंग के बावजूद किंगफिशर एयरलाइंस को कर्ज दिया. ईडी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग के एक मामले में माल्या के खिलाफ जांच कर रही है.

माल्या को यह समझना होगा कि कर्ज को चुकाना और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप दो अलग बाते हैं. माल्या को इस मामले में किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए. 

बैंकों को वहीं इस बात की कोशिश करनी चाहिए कि माल्या को सितंबर 2016 के बाद अतिरिक्त समय लेने का मौका नहीं मिले.

First published: 1 April 2016, 12:32 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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