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खातों में मिनिमम बैलेंस न रखने पर बैंकों ने ग्राहकों से वसूले 5,000 करोड़, SBI सबसे आगे

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 August 2018, 14:30 IST

बैंकिंग आंकड़ों के मुताबिक 21 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और तीन प्रमुख निजी क्षेत्र के ऋणदाताओं ने 2017-18 में अपने ग्राहकों के खातों में न्यूनतम शेष राशि के रख-रखाव के लिए 5000 करोड़ रुपये वसूले.

2017-18 के दौरान भारत के सबसे बड़ा ऋणदाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, जिसको 6,547 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था, ने अपने ग्राहकों से खातों में न्यूनतम राशि बनाए रखने के लिए सबसे ज्यादा रकम वसूली. सरकारी स्वामित्व वाले एसबीआई ने अप्रैल 2017 से मासिक औसत बैलेंस आधार से नीचे जमा पर 24 बैंकों द्वारा वसूली गई कुल राशि 4,989.5 करोड़ की लगभग आधा राशि 2,433.87 करोड़ रुपये अपने ग्राहकों से वसूले.

 

एसबीआई की इस वसूली से उसे अतिरिक्त आय मिली और एसबीआई के घाटे को कम करने में उसे मदद मिली. एसबीआई के बाद, 2017-18 के दौरान न्यूनतम बैलेंस के बदले एचडीएफसी बैंक लिमिटेड अपने ग्राहकों से पैसे वसूलने में दूसरे स्थान पर रहा. उसने अपने ग्राहकों से कुल 590.84 करोड़ रुपये चार्ज किये. जो 2016-17 में 619.39 करोड़ रुपये से कम है.

इस तरह निजी ऋणदाता एक्सिस बैंक लिमिटेड ने पिछले वित्त वर्ष में 530.12 करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड ने अपने ग्राहकों से 317.6 करोड़ रुपये का शुल्क लिया. एसबीआई 2012 में पहले यह व्यवस्था शुरू की थी. जिसे उसने 1 अप्रैल 2017 से फिर से शुरू किया.

भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों के अनुसार, बैंकों को सेवा / विविध शुल्क लेने की अनुमति है. मूल बचत बैंक जमा योजना के तहत खाते खोलने वाले ग्राहक के साथ-साथ प्रधानमंत्री जन धन योजना को न्यूनतम शेषराशि बनाए रखने की आवश्यकता नहीं है.

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First published: 5 August 2018, 14:27 IST
 
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