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मिनिमम बैलेंस के नाम पर हो रही है ठगी, बैंक वसूल रहे हैं ये चार्ज

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2018, 15:01 IST

एक ओर सरकार जहां डेबिट कार्ड के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है. वहीं दूसरी ओर बैंक सरकार की इस कोशिश को पलीता लगा रहे हैं. ये सब हो रहा है बैंक खाते में न्यूनतम राशि के अभाव में. दरअसल, जब ग्राहक के खाते में न्यूनतम राशि कम होती है और वह एटीएम से कैश निकालने या कोई पैमेंट करने की कोशिश करता है तो ना कैश निकलता और ना ही पैमेंट होता, उल्टा उसका खाते से 17 से 25 रुपये तक चार्ज कर दिया जाता है.

बता दें कि देश का सबसे बड़ा बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ऑटोमेटेड टेलर मशीन (ATM) या पॉइंट ऑफ सेल (POS) टर्मिनल पर डेबिट कार्ड स्वाइप करने के बाद ट्रांजैक्शन डिक्लाइन होने पर 17 रुपये वसूलता है. आईआईटी बॉम्बे में गणित के प्रोफेसर आशीष दास कहते हैं कि खरीदारी के बाद नकदी रहित भुगतान (नॉन-कैश मर्चेंट ट्रांजैक्शन) के लिए डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर इतने बड़े जुर्माने का कोई मतलब नहीं है और इससे कार्ड या डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों को कहीं से भी बल नहीं मिलता.

बता दें कि ट्रांजैक्शन डिक्लाइन नहीं होने पर भी बैंक रुपये वसूली कर रहे हैं. जबकि सरकार ने मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर की सीमा तय कर रखी है. बता दें कि एमडीआर वह फीस है जो बैंक भुगतान स्वीकार करनेवाले मर्चेंट्स से वसूलते हैं. दूसरी तरफ, बैंक ग्राहकों को शाखा या एटीएम से पैसे निकालकर खरीदारी करने की जगह डेबिट कार्ड से भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करने का अभियान भी चला रहे हैं.

प्रोफेसर दास बताते हैं कि लोगों के लिए मौजूदा परिस्थिति बेहद ऐंटि-डिजिटल और जोखिम भरी है जो तमाम खर्चों के बाद पैसे नहीं बचा नहीं पा रहे हैं और मासिक वेतन पर निर्भर रहते हैं. ऐसे चार्ज डिजिटल पेमेंट्स को हतोत्साहित करते हैं. वहीं बैंकों का कहना है कि जिस तरह चेक डिक्लाइन करने पर जुर्माना लगता है. उसी तरह डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन डिक्लाइन पर भी फीस वसूली जाती है. चेक बाउंस का नियम ही असफल ईसीएस (इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सर्विसेज) डेबिट ट्रांजैक्शन पर लागू होता है.

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First published: 22 March 2018, 14:58 IST
 
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