Home » बिज़नेस » Before Raghuram Rajan leaves, here's what Reserve Bank of India thinks of the economy
 

आरबीआई की सालाना रिपोर्ट: 2015-16 में आर्थिक उपलब्धियां और संभावनाएं

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 3 September 2016, 7:34 IST
404
परियोजनाएं

2015-16 में ठप. इनमें 242 निजी परियोजनाएं थीं.

भारत का केंद्रीय बैंक- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इस सप्ताह 2015-16 की सालाना रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में देश की पिछले साल की आर्थिक उपलब्धियों और अगले साल की आर्थिक योजनाओं का ब्यौरा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक विकास क्रमश: बढ़ रहा है, जबकि सार्वजनिक और निजी परियोजनाओं में निवेश और मुद्रास्फीति चिंता का विषय है.

रिपोर्ट पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

404

  • 2015-16 में ठप परियोजनाएं. इनमें 242 निजी परियोजनाएं थीं.
  • इनमें से अधिकांश परियोजनाएं पर्यावरण अधिनियमों की वजह से ठप हुईं, और ये विद्युत, सड़क, पेट्रोलियम और कोयला क्षेत्र की हैं.
  • हालांकि ठप परियोजनाओं की संख्या काफी कम हुई है. 2014-15 में 592 परियोजनाएं ठप थीं, जबकि 2015-16 में 404 रह गईं.
  • 2011-12 में कुल 552 परियोजनाएं ठप थीं.

5,500
अरब

रुपये

  • 2015-16 में ठप सभी परियोजनाओं की अनुमानित लागत.
  • उल्लेखनीय ढंग से, पिछले साल ठप परियोजनाओं की लागत ज्यादा थी, लगभग 9,000 बिलियन रुपए.
  • इसकी मुख्य वजह यह है कि प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप ने 2015-16 में 168 बड़ी परियोजनाओं को इजाजत दे दी थी.
  • रिपोर्ट के मुताबिक 'मेक इन इंडिया' जैसी पहल से भी निवेश की स्थिति सुधरने में मदद मिली है.

6.1
प्रतिशत

  • जुलाई 2016 तक ग्रामीण और शहरी, दोनों की मिलाकर मुद्रास्फीति. यह 23 महीनों का अधिकतम रिकार्ड है.
  • जनवरी में मुद्रास्फीति दर 5.7 फीसदी थी. यह जनवरी के बाद सब्जियों, चीनी, प्रोटीन आइटम्स, फल और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दामों में वृद्धि के कारण बढ़ी.
  • 50 फीसदी मुद्रास्फीति में योगदान खाद्य पदार्थों के दामों का रहा. खाद्य पदार्थो की श्रेणी में सबसे ज्यादा योगदान दालों के भावों का रहा.
  • उत्पाद में कमी, इंतजाम में कमी और प्राकृतिक आपदाओं के कारण दालों के भाव चढ़े.

7.1
प्रतिशत

  • बुधवार को केंद्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा जारी विकास आंकड़ों के अनुसार 2015-16 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर.
  • इस तिमाही के लिए विशेषज्ञों ने 7.4 से 7.6 फीसदी की वृद्धि दर का पूर्वानुमान किया था. दिलचस्प है कि आरबीआई के हिसाब से भी 2015-16 में 7.6 प्रतिशत वृद्धि दर है.
  • कमजोर आर्थिक विकास दर के तीन बड़े कारण हैं- कमजोर पूंजी निवेश, निर्यात और दो साल का लगातार सूखा, जिसने कृषि क्षेत्र को मुख्य रूप से प्रभावित किया.

तो भविष्य की संभावनाएं कैसी रहेंगी?

आरबीआई के अनुसार अर्थव्यवस्था को मुख्य सहयोग वेतन और मजदूरी में वृद्धि, उपभोग व्यय, और समान्य से ज्यादा मानसून की वजह से ग्रामीण मांग के कारण सेवा क्षेत्र से मिलेगा.

इसके अलावा, वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से व्यापार और निवेश में मदद मिलेगी.

First published: 3 September 2016, 7:34 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी