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तमिलनाडु में पेप्सी-कोका कोला पर प्रतिबंध, कंपनियां जुटीं समाधान खोजने में

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 January 2017, 15:07 IST
(फ्लिकर)

तमिलनाडु के व्यापार संघ ने फैसला किया है कि वे आगामी 1 मार्च से प्रमुख पेय कंपनी पेप्सिको और कोका कोला के उत्पादों की बिक्री नहीं करेंगे. इस फैसले के बाद पेय पदार्थ बनाने वाली दुनिया की दो प्रमुख कंपनियों की नींद उड़ गई है और वे किसी भी तरह इसका समाधान खोजने में जुटी हैं.

सूत्रों के मुताबिक पेप्सी और कोका कोला कंपनी के स्थानीय अधिकारी और इन्हें बनाने वाले स्थानीय फ्रेंचाइजी व्यापार संगठन के अधिकारियों से मिलकर उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मनाने में जुटे हैं. गुड़गांव में दोनों कंपनियों के मुख्यालय में बैठे शीर्ष अधिकारी भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं. वे इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि अगर स्थानीय वार्ता असफल होती है, तो क्या रास्ता अपनाया जाए.

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हालांकि दोनों कंपनियां फिलहाल स्थानीय स्तर पर ही बातचीत करके इस मामले को सुलझाने में जुटी हैं और शीर्ष अधिकारियों को इसमें तभी शामिल करने का मन बना चुकी हैं, जब शुरुआती चर्चा विफल हो.

इस सप्ताह की शुरुआत में फेडरेशन ऑफ तमिलनाडु ट्रेडर्स एसोसिएशन जैसे तमिलनाडु के व्यापारिक संगठनों ने घोषणा की थी कि फरवरी के अंत के बाद उनके रिटेलर्स (खुदरा विक्रेता) इन दो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पेय पदार्थों को बेचना बंद कर देंगे. संगठनों के मुताबिक करीब 15 लाख खुदरा दुकानें और 6,000 छोटे व्यापारिक संगठन उनके फैसले को मानेंगे.

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जहां राज्य के पेय पदार्थ बाजार पर कोका कोला और पेप्सिको की हिस्सेदारी 85 फीसदी है, पेप्सिको के पास फूड एंड स्नैक्स के भी काफी उत्पाद हैं. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि क्या यह पाबंदी इनके खाद्य उत्पादों पर भी लगाई जाएंगी या नहीं. 

लेकिन अगर पाबंदी लगाई गई तो इससे इन दोनों कंपनियों को भारी नुकसान होगा. एक अनुमान के मुताबिक इस फैसले से दोनों कंपनियों को एक साल में 1,400 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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वहीं, व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापारिक संगठनों द्वारा बिना किसी वैधानिक पृष्ठभूमि के ऐसी पाबंदी लगाने से अदालत में उनका केस मजबूत ही नहीं होगा. 

पूर्व में ऐसे ही मामले का सामना करने वाले एक उद्योग विशेषज्ञ के मुताबिक, "यह पाबंदी बिना किसी कानूनी आधार पर व्यापारिक इकाइयों द्वारा लगाई गई है न कि स्थानीय प्रशासन या फिर संबंधित राज्य विभागों द्वारा. ऐसे मामलों में अदालत में यह फैसला पक्षपातपूर्ण नजर आएगा क्योंकि वे राज्य में सभी कोला पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की बजाय केवल दो कंपनियों की ही बिक्री को बंद कर रहे हैं." सूत्रों के मुताबिक अगर जरूरत पड़ी तो कोला कंपनियां मामले को अदालत में भी ले जा सकती हैं.

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इससे पहले व्यापारिक संगठनों ने कहा था कि दो कंपनियों के उत्पादों की बिक्री पर पाबंदी लगाने के उनके फैसले के पीछे तमाम कारण हैं. इनमें उनका विदेशी होना, भारतीय बाजार में लाभ कमाकर विदेश ले जाना और क्षेत्र में भूजल स्तर दोहन शामिल है. 

हालांकि देश में इन दो कंपनियों के लिए भूजल स्तर दोहन कोई नई बात नहीं है. पिछले कुछ सालों में इन कंपनियों पर देश के विभिन्न हिस्सों में जहां इनके प्लांट मौजूद है, इस तरह के आरोप इन पर लगते रहे हैं. दिसंबर 2016 में मद्रास हाई कोर्ट ने इन दो कंपनियों पर तमिराबानी नदी से पानी निकालने पर अंतरिम निषेधाज्ञा जारी की थी.

First published: 28 January 2017, 15:07 IST
 
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