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5G स्पेक्ट्रम की कीमत से मुश्किल में पड़ सकते हैं एयरटेल-वोडाफोन

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 July 2019, 11:32 IST

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच का कहना है कि भारत में 5G स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए बोली लगाने के लिए एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसे टेलीकॉम कंपनियों के लिए 70 मिलियन डॉलर प्रति मेगाहर्ट्ज की कीमत मुश्किल में डाल सकती है. फिच का मानना है कि टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) 5G स्पेक्ट्रम की कीमत 3300-3600MHz के स्पेक्ट्रम बैंड के लिए 70 मिलियन डॉलर प्रति M Hz है जो पिछले समय में 3G और 4G स्पेक्ट्रम की नीलामी की तुलना में बहुल महंगा है.

फिच का कहना है कि वर्तमान मूल्य पर प्रत्येक टेलिकॉम कंपनी को 5G स्पेक्ट्रम के 100 मेगाहर्ट्ज के लाइसेंस के लिए लगभग 7 बिलियन डॉलर की आवश्यकता होगी. फिच ने कहा कि "हमें भारती और वोडाफोन-आइडिया द्वारा 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी में सीमित भागीदारी की उम्मीद है''. फिच ने कहा "हम मानते हैं कि 5 जी की अल्पावधि में केवल व्यावसायिक व्यवहार्यता सीमित हो सकती है, क्योंकि भारत में 4 जी की पैठ अभी भी कम है और इसमें बहुत कम आकर्षक सामग्री या एप्लिकेशन हैं.


 

जून में संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि सरकार द्वारा इस साल नीलामी आयोजित करने की संभावना है और अगले 100 दिनों में परीक्षण भी शुरू करेगी. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय एआरपीयू (प्रति उपयोगकर्ता औसत राजस्व) दुनिया में सबसे कम $ 1.7 प्रति माह है. फिच ने कहा “हम मानते हैं कि भारतीय उपभोक्ता मोबाइल सेवाओं पर अधिक खर्च कर सकते हैं.

यह सितंबर 2016 में Jio के बाजार में प्रवेश के बाद से औसत मासिक उपयोगकर्ता डेटा खपत में 10 गुना की वृद्धि से स्पष्ट है. हालांकि औसत उद्योग टैरिफ में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है. हमारा मानना है कि अगर टेलीकॉम प्रति मेगाबाइट डेटा टैरिफ को थोड़ा बढ़ाते हैं तो भी डेटा की मांग मजबूत रहेगी.

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First published: 30 July 2019, 11:11 IST
 
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