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ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सहमा शेयर बाजार, ब्रेग्जिट के बाद दूसरी बड़ी गिरावट

अभिषेक पराशर | Updated on: 12 September 2016, 16:27 IST
QUICK PILL
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से सितंबर महीने में ब्याज दरों को बढ़ाए जाने के संकेत के बीच भारत समेत एशिया के शेयर बाजारों में जबरदस्त गिरावट आई है. हफ्ते के पहले दिन भारतीय शेयर बाजार खुलते के साथ ही करीब 500 अंक तक टूट गया.
  • बीएसई सेंसेक्स 1.54 फीसदी की कमजोरी के साथ 443.71 अंक टूटकर 28,353.54 अंक पर बंद हुआ. बीएसई सेंसेक्स में सर्वाधिक टूटने वाले शेयरों में टाटा स्टील (5.30 फीसदी), अदानी पोर्ट्स (4.37 फीसदी), एसबीआई (4.28 फीसदी) रहे. 
  • सितंबर महीने की समीक्षा बैठक में अमेरिका में ब्याज दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी की संभावना की वजह से भारतीय शेयर बाजार में ब्रेग्जिट के बाद सबसे बड़ी गिरावट आई है.

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से सितंबर महीने में ब्याज दरों को बढ़ाए जाने के संकेत के बीच भारत समेत एशिया के शेयर बाजारों में जबरदस्त गिरावट आई है. हफ्ते के पहले दिन भारतीय शेयर बाजार खुलते के साथ ही करीब 500 अंक तक टूट गया. 

सेंसेक्स 28,251.31 के निचले स्तर तक फिसल गया जबकि पिछले हफ्ते सेंसेक्स 29,000 के स्तर को पार करने में सफल रहा था, जो पिछले 17 महीनों का उच्चतम स्तर था. सोमवार को सेंसेक्स में आई गिरावट 24 जून के बाद आई सबसे बड़ी गिरावट है. 24 जून को ब्रिटेन ने यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के फैसले पर मुहर लगाई थी.

बीएसई सेंसेक्स 1.54 फीसदी की कमजोरी के साथ 443.71 अंक टूटकर 28,353.54 अंक पर बंद हुआ. बीएसई सेंसेक्स में सर्वाधिक टूटने वाले शेयरों में टाटा स्टील (5.30 फीसदी), अडानी पोर्ट्स (4.37 फीसदी), एसबीआई (4.28 फीसदी) रहे. 

सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग स्टॉक्स को हुआ. बीएसई बैंकेक्स 2.39 फीसदी की कमजोरी के साथ 555.83 अंक टूटकर 22,693.98 अंक पर बंद हुआ. 

सबसे ज्यादा नुकसान बैंक ऑफ बड़ौदा (5.93 फीसदी), यस बैंक (5.63 फीसदी) और पंजाब नेशनल बैंक (5.31 फीसदी) के शेयरों में हुआ. वहीं ऑटो शेयरों में भी जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली. बीएसई ऑटो इंडेक्स 2.81 फीसदी की कमजोरी के साथ 595.71 अंक टूटकर 22,248.57 अंक पर बंद हुआ.

रुपये के कमजोर होने की आशंका के बीच आईटी इंडेक्स में तेजी आई और यह 10,296.28  पर बंद हुआ.

वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में भी जबरदस्त 1.70 फीसदी की गिरावट आई है. निफ्टी में फिलहाल 5 शेयर हरे निशान में जबकि 46 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं.  निफ्टी 151.60 अंक टूटकर 8,715.60 अंक पर बंद हुआ.

सेंसेक्स 28,251.31 के निचले स्तर तक फिसल गया. पिछले हफ्ते सेंसेक्स 29,000 के स्तर को पार करने में सफल रहा था.

दरअसरल फेडरल रिजर्व बैंक ऑफ बॉस्टन के प्रेसिडेंट इरिक रोसनग्रेन के बयान के बाद एशियाई बाजारों में भूचाल जैसी स्थिति बनी है. 

इरिक ने कहा कि सितंबर महीने की समीक्षा बैठक में अमेरिका में ब्याज दरों में की जाने वाली बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अर्थव्यवस्था की रफ्तार को देखते हुए चरणबद्ध तरीके से ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है.

एशियाई बाजार के लिए यह अप्रत्याशि स्थिति है, जिससे वह फिलहाल निपटने को तैयार नहीं हैं. विश्लेषकों और बाजार के अनुमान के मुताबिक ही हाल ही में यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा के दौरान ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है.

पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में आई मजबूती की एक अहम वजह फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में बढ़ोतरी नहीं किए जाने की उम्मीद थी. इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका में रोजगार के खराब आंकड़ों का आना था. 

सितंबर महीने में ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व की बैठक होनी है और रोजगार के खराब आंकड़ों की वजह से ब्याज दरों में कटौती की संभावना खत्म हो गई थी. 

रिजर्व बैंक ऑफ बॉस्टन के प्रेसिडेंट इरिक रोसनग्रेन के बयान के बाद एशियाई बाजारों में भूचाल जैसी स्थिति है.

दरअसल फेड रिजर्व की चेयरपर्सन जैनेट एलन यह कह चुकी थी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिहाज से अनुकूल है लेकिन सितंबर महीने में रोजगार के खराब आंकड़ों के बाद यह अनुमान लगाया जा रहा था कि दिसंबर तक ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी.

हालांकि इरिक के बयान ने इस संभावना को खत्म कर दिया है. बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में कटौती के असन को झेलने की स्थिति में नहीं है. बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स टूटकर बंद हुआ. 

क्या होगा असर?

अमेरिकी फेडरल रिजर्व अगर सितंबर महीने की समीक्षा बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता है तो इसकी सीधा असर एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा. 

दरों में बढ़ोतरी के फैसले के तत्काल बाद ही इन बाजारों में नकदी की कमी हो जाएगी. यह भारत के लिए भी सही नहीं होगा.

वहीं ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर रुपये की सेहत पर होगा. डॉलर में आने वाली मजबूती की वजह से रुपये के साथ अन्य एशियाई करेंसी भी टूटेंगी. रुपये के कमजोर होने का असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा.

First published: 12 September 2016, 16:27 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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