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साइरस मिस्त्री को झटका, टाटा मोटर्स के स्वतंत्र निदेशकों का नहीं मिला सामूहिक समर्थन

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 November 2016, 10:15 IST
(कैच)

टाटा मोटर्स के निदेशकों की बैठक के बाद टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री को झटका लगा है. कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों ने कहा है कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने ने उनके नेतृत्व को सर्वसम्मति से समर्थन नहीं दिया था.

टाटा मोटर्स की पांच घंटे तक चली बैठक के बाद जारी एक बयान में कहा गया है कि छोटी कार नैनो सहित दूसरे सभी फैसलों पर साइरस मिस्त्री ने कंपनी का समर्थन किया था.

टाटा संस के हटाए गए चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने छोटी लखटकिया कार नैनो के फैसले की आलोचना की थी. मिस्त्री को इससे पहले इंडियन होटल्स कंपनी और टाटा केमिकल्स की बैठक में स्वतंत्र निदेशकों का समर्थन मिला था. हालांकि टाटा मोटर्स की बोर्ड बैठक में ऐसा कुछ नहीं दिखा.

आईएचसीएल और टाटा केमिकल्स से अलग रुख

टाटा मोटर्स बोर्ड की बैठक के बाद जारी बयान से साफ है कि साइरस मिस्त्री को सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिला है. टाटा और मिस्त्री के बीच बढ़ते विवाद और टाटा संस द्वारा मिस्त्री को समूह की दूसरी कंपनियों से हटाए जाने के फैसले को देखते हुए सोमवार की बैठक अहम थी.

हालांकि टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बावजूद मिस्त्री समूह की कई अन्य कंपनियों के चेयरमैन पद पर कायम हैं. इनमें टाटा मोटर्स, टाटा केमिकल्स और आईएचसीएल शामिल हैं.

पढ़ें: टाटा समूह के चेयरमैन पद से साइरस मिस्त्री हटाए गए

टाटा मोटर्स ने बोर्ड बैठक के बाद बयान में कहा, "टाटा मोटर्स के स्वतंत्र निदेशकों की हालिया घटनाक्रमों के प्रभाव की समीक्षा और उन पर विचार करने के लिए बैठक हुई. इस दौरान मीडिया में आई संचालन, प्रबंधन तथा कंपनी के कारोबार संबंधी रिपोर्टों की भी समीक्षा की गई."

स्वतंत्र निदेशकों ने इस बात की पुष्टि की है कि बोर्ड द्वारा रणनीति, परिचालन तथा कंपनी के कारोबार के बारे में जो भी फैसले लिए गए वे सर्वसम्मति से थे. कंपनी के चेयरमैन और प्रबंधन ने इसी के मुताबिक उनको लागू किया.

टाटा मोटर्स की बैठक में स्वतंत्र निदेशकों ने इस बात को भी दोहराया कि कंपनी का संचालन, निगरानी और प्रबंधन बोर्ड के निर्देशन में किया जा रहा है. बयान में साथ ही कहा गया है कि कंपनी और उसकी दूसरी शाखाओं के प्रबंधन को स्वतंत्र निदेशकों का पूरा भरोसा और समर्थन है.

टाटा मोटर्स का यह बयान आईएचसीएल और टाटा केमिकल्स के रुख से अलग है, जिनके स्वतंत्र निदेशकों ने मिस्त्री का सर्वसम्मति से समर्थन किया था.

बताया जा रहा है कि एक स्वतंत्र निदेशक ने मिस्त्री को समर्थन का प्रस्ताव किया, लेकिन बाद में यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका.

2013 में साइरस ने संभाली थी कमान

टाटा संस ने पिछले महीने साइरस मिस्त्री को चेयरमैन के पद से हटा दिया है. उनकी जगह वापस रतन टाटा को अगले चार महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया गया है.

बोर्ड की बैठक में एक पैनल भी गठित हुआ था. यह पैनल रतन टाटा के नए उत्तराधिकारी और समूह के लिए एक योग्य चेयरमैन की तलाश करेगा. इस पैनल में ख़ुद रतन टाटा, रोनेन सेन, वेणू श्रीनिवासन और अमित चंद्रा शामिल हैं. 

टाटा संस परिवार से नहीं हैं मिस्त्री

साइरस मिस्त्री ने जनवरी 2013 में टाटा संस की कमान संभाली थी. उनसे पहले यह पद टाटा संस के परिवार में ही किसी व्यक्ति के पास रहा था. साइरस मिस्त्री पहले बाहरी व्यक्ति थे जिन्हें समूह के चेयरमैन की ज़िम्मेदारी सौंपी गई, मगर चार साल बाद उन्हें हटा दिया गया. 

पढ़ें: क्या सचमुच साइरस मिस्त्री रतन टाटा के सपनों को पूरा करने में नाकाम रहे थे?

टाटा समूह के 144 साल के इतिहास में चेयरमैन का पद संभालने वाले वे सिर्फ छठे व्यक्ति थे. इससे पहले रतन टाटा ने इस पद पर 50 साल तक बतौर समूह चेयरमैन काम किया था. रतन टाटा 28 दिसंबर को रिटायर हो गए थे, लेकिन वह समूह के मानद चेयरमैन बने हुए थे.

साल 2011 में जब मिस्त्री को चेयरमैन बनाए जाने की घोषणा हुई, तब रतन टाटा ने उनके बारे में कहा था, "वह काफ़ी बुद्धिमान हैं और उन्हें जो भूमिका दी गई है उसके लिए वह पूरी तरह योग्य हैं."

First published: 15 November 2016, 10:15 IST
 
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