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ये हैं वो तीन विमान जो बोइंग 737 मैक्स से पहले दुर्घटनाओं के कारण रह चुके हैं विवादों में

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 March 2019, 12:08 IST

अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने बुधवार को बोइंग 737 मैक्स एयरलाइनर को उड़ने से रोक दिया. बोइंग ने घोषणा की है कि MCAS की कमियों को ठीक करने के लिए एक सॉफ़्टवेयर अपडेट आने वाला है. हालही में बोइंग के हादसों के बाद यह बड़ी विवादित एयरलाइन्स में शमिल हो गई है. हालांकि इस मामले में बोइंग मैक्स मुश्किल में दौड़ने वाला पहला विमान नहीं है. इससे पहले भी कई बड़ी कंपनियों के ये विमान चर्चाएं बटोर चुके हैं.

डी हैविलैंड कॉमेट

डी हैविलैंड कॉमेट ने 1952 में जब सेवा में प्रवेश किया था तब वह सबसे तेज, और विमानन प्रौद्योगिकी में शिखर पर था. लेकिन उसके बाद वह लगातार आकाश से गिरने लगा. इन दुर्घटनाओं में से कुछ में पंखों के साथ एक डिजाइन को जिम्मेदार ठहराया गया था, जिसे जल्दी ठीक कर लिया गया. 1953 और 1954 के बीच इस विमान की कई दुर्घटनाएं हुई. विमान को ब्रिटिश सरकार द्वारा 1954 में उड़ने से रोक दिया गया. आख़िरकार पता चला कि विमान में मोटी धातु परत इसके लिए जिम्मेदार थी.

डी हैविलैंड कॉमेट को मोटी त्वचा और अंडाकार खिड़कियों के साथ फिर से डिजाइन किया गया था, इससे पहले कि वह सेवा में वापस आ सके. दुर्भाग्य से कॉमेट की जगह उस समय तक अमेरिका के बोइंग 707 और डगलस डीसी -8 ने ले ली. 1950 और 60 के दशक के प्रारंभ में 100 से अधिक डी हैविलैंड कॉमेट बनाए गए.

 

मैकडॉनेल डगलस डीसी -10

मैक्डॉनेल डगलस डीसी -10 ने 1971 में बोइंग 747 जंबो जेट के एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में सेवा में प्रवेश किया लेकिन शुरुआत से ही डीसी -10 समस्याओं से त्रस्त था. 1972 में, अमेरिकन एयरलाइंस फ़्लाइट 96, के एक नए डीसी DC-10 खराबी के कारण आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी. इसमें कुछ यात्री और चालक दल घायल हो गए लेकिन किसी की मौत नहीं हुई.

 

दो साल बाद तुर्की एयरलाइंस की उड़ान 981 एक और डीसी -10 को भी विघटन का सामना करना पड़ा. दुर्भाग्य से इस बार विमान से बाहर निकलने वाली हवा के विस्फोटक बल ने केबिन के फर्श को चकरा दिया, जिससे उड़ान नियंत्रण प्रभावित हो गया. विमान में सवार सभी 346 यात्रियों और चालक दल के लोगों की मौत हो गई. 1979 में एक दुर्घटना के बाद इसके उड़ने पर रोक लगा दिया गया. इस दुर्घटना में विमान में सवार सभी 271 मारे गए.

एयरबस ए 320

एयरबस ए 320 की 1980 के दशक के मध्य में शुरुआत के बाद, सिंगल-आइज़ल जेट इतिहास में दूसरा सबसे अधिक बिकने वाला एयरलाइनर बन गया है, जो केवल बोइंग 737 के पीछे था. ए 320 का मुख्य आकर्षण इसकी उन्नत फ्लाई-बाय-वायर कंप्यूटर-सहायक नियंत्रण प्रणाली है. पदार्पण के समय इस बात पर बहुत बहस हुई कि क्या उद्योग इतने उच्च स्तर के स्वचालन के लिए तैयार है.

मानव-मशीन इंटरैक्शन की चिंताओं को एयर फ्रांस फ्लाइट 296 की दुर्घटना ने और भी मजबूत कर दिया. ए 320 की क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन की गई प्रदर्शन फ्लाइट जो 1988 में एक एयर शो के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. दुर्घटना में तीन यात्रियों की मौत हो गई. जांचकर्ताओं ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में कहा, "ए 320 में नई विशेषताएं हैं, जिसने कप्तान के दिमाग में कुछ अति आत्मविश्वास पैदा कर दिया होगा. " लेकिन घटना के बाद से तीन दशकों में विमान की प्रतिष्ठा फिर से ठीक हो गई.

बोइंग 737 मैक्स की नाक में है दिक्कत, पायलट कर चुके है कई बार शिकायत

बोइंग में क्या दिक्कत 

मैक्स 8 इथियोपिया दुर्घटना के बाद 40 से अधिक देशों द्वारा बढ़ते वैश्विक प्रतिबंध के केंद्र में है. एक न्यूज़ अमेरिकी वेबसाइट संयुक्त राज्य अमेरिका के पायलटों ने हाल के महीनों में उड़ान के महत्वपूर्ण क्षणों के दौरान अपने बोइंग 737 मैक्स 8 जेट को नियंत्रित करने में समस्याओं के बारे में कम से कम पांच बार शिकायत की थी.

फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) के घटना डेटाबेस की समीक्षा के अनुसार पिछले अक्टूबर में इंडोनेशिया में लायन एयर दुर्घटना के संभावित कारण सामने आये, जिनमे एंटी-स्टॉल सिस्टम शामिल है, जो पायलटों को सेल्फ- रिपोर्ट करता है. हालांकि जांचकर्ताओं ने यह नहीं बताया है कि क्या यही दिक्कत रविवार को इथियोपियाई एयरलाइंस की उड़ान के दुर्घटनाग्रस्त होने के संभावित कारण के रूप में उभर कर आई थी. 

First published: 16 March 2019, 12:08 IST
 
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