Home » बिज़नेस » Bombay High Court asks RBI- what is your compulsion behind changing the currency notes?
 

अदालत ने RBI से पूछा- बार-बार करेंसी नोट बदलने के पीछे आपकी क्या मजबूरी है ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 August 2019, 13:41 IST

उच्च न्यायालय ने गुरुवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को निर्देश दिया कि समय-समय पर करेंसी नोटों के फीचर्स और आकार को बदलने के कारण को लेकर एक हलफनामा दायर करें. मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति एन एम जामदार की पीठ नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्लाइंड (एनएबी) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दृष्टिहीनों द्वारा आसानी से पहचानने के लिए नए सिक्कों और नोटों में विशिष्ट विशेषताओं को शामिल करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी.

चीफ जस्टिस नंदराजोग ने आरबीआई की ओर से पेश वकील से पूछा कि नोट बदलने के लिए मजबूरी क्यों थी. उन्होंने कहा “आप (सरकार) इसके पीछे नकली मुद्रा का कारण बताते हैं लेकिन मुझे इस कारण पर संदेह है. डिमोनेटाइजेशन से पता चला कि यह एक मिथक था कि 10,000 करोड़ रुपये पाकिस्तान के पास थे. अदालत ने RBI को हलफनामा दायर करने का निर्देश देते हुए पूछा. “समय-समय पर नोटों के फीचर्स को और आकार को बदलने की RBI की क्या मजबूरी है?''

पिछली सुनवाई में आरबीआई ने अदालत को बताया था कि बैंक नोटों की पहचान करने में नेत्रहीनों की सहायता के लिए एक उपकरण विकसित करने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गई थी. समिति ने एक मोबाइल-आधारित एप्लिकेशन की सिफारिश की है, जो नोटों की पहचान करेगा और व्यक्ति को मौखिक रूप से सूचित करेगा.

भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को लगा झटका 

गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद आरबीआइ ने  करेंसी नोटों के आकार और फीचर्स में कई बदलाव किये हैं. आरबीआई न 100, 200 और 500 के नए नोट जारी किये. नोटबंदी से पहले सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि इससे फेक करेंसी में कमी आएगी लेकिन इनका मिलना अभी कम नहीं हुआ है.   

 

First published: 2 August 2019, 13:41 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी