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एंजेल टैक्स से परेशान Startups के लिए मोदी सरकार ने दी बड़ी राहत, किया ये बदलाव

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 February 2019, 15:54 IST

स्टार्टअप्स को एक बड़ी राहत देते हुए सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए एंजल टैक्स मानदंडों में ढील देने का फैसला किया है. जिसमें स्टार्टअप्स द्वारा आयकर रियायतों का लाभ उठाने के लिए निवेश सीमा को बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये करना शामिल है. अब तक यह सीमा 10 करोड़ रूपये थी. एक अधिकारी ने कहा स्टार्टअप्स के लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 56 (2) (vi) के तहत निवेश पर छूट प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाने को लेकर एक अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी.

स्टार्टअप्स की परिभाषा एक ऐसी इकाई तक बढ़ाई गई है जो वर्तमान सात वर्षों के बजाय निगमन या पंजीकरण की तारीख से दस साल तक संचालन में है. अधिकारी ने कहा, "एक ऐसी इकाई को स्टार्टअप माना जाएगा यदि किसी वित्तीय वर्ष के लिए उसका कारोबार, उसके समावेश या पंजीकरण के बाद, मौजूदा 25 करोड़ रुपये के बजाय 100 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है." इसके अलावा, सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा 100 करोड़ रुपये के निवेश या स्टार्टअप में 250 करोड़ रुपये का कारोबार करने पर आयकर अधिनियम की धारा 56 (2) (viib) से 25 करोड़ रुपये की सीमा से अधिक की छूट दी जाएगी.

 

क्या है एंजेल टैक्स

स्टार्टअप्स द्वारा फंड पर जुटाए गए पैसे पर इनकम टैक्स जो टैक्स लगता है उसे एंजेल टैक्स कहते हैं. हालही में कई स्टार्टअप ने इस टैक्स को लेकर नोटिस मिलने की बात कही थी. दरअसल जब स्टार्टअप अपने बिजनेस के लिए फंड जुटाते हैं तो वह इस पैसे के बदले पैसे देने वाली कंपनी को अपने शेयर देती है.

ये शेयर की असल कीमत से ज्यादा में दिए जाते हैं. इसी अतिरिक्त कीमत पर सरकार टैक्स लगाती है, जिसे एंजेल टैक्स कहते है. एक रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 100 से ज्यादा स्टार्टअप को स्टार्टअप को एंजेल टैक्स ना चुकाने के लिए नोटिस मिल चुका है. हालांकि अब तक इसमें 10 करोड़ रुपये से कम के निवेश पर छूट मिलती है. इसकी शुरुआत 2011 में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने की थी.

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First published: 19 February 2019, 15:54 IST
 
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