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मोदी के PM बनने के बाद तेल की कीमतें सबसे उच्च स्तर पर, रुपया फिसलकर हुआ 67 पार

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 May 2018, 12:06 IST

नरेंद्र मोदी के मई 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद पहली बार इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अपने उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं. सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क वाला ब्रेंट क्रूड 75.73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. इसी बीच रूपये में भी लगातार गिरावट जारी है. सोमवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 67 के स्तर को भी पार कर गया.

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 2015 में तेल 45.25 डॉलर प्रति बैरल पर था.  इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का लाभ उठाते हुए सरकार ने राजकोषीय घाटे को पूरा करने में काफी हद तक सफलता भी पायी.

सोमवार को सभी एशियाई मुद्राएं डॉलर के मुकाबले गिर गईं, लेकिन रूपये को 0.40 फीसदी का नुकसान हुआ. इस साल रुपया सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा रही जो डॉलर के मुकाबले 4.87 फीसदी गिर गई. मुद्रा सलाहकार आईएफए ग्लोबल के मुताबिक रुपया कमजोर 67.40 से 67.50 के स्तर तक जा सकता है. यदि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्थिति खराब हो जाती है और तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो यह 70 डॉलर तक पहुंच सकता है.

विश्लेषकों का मानना है कि वेनेजुएला और उसके तेल उद्योग के आर्थिक पतन के साथ-साथ ट्रम्प प्रशासन से ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंध लगाए जाने की संभावनाओं से कीमतें और बढ़ने की आशंका है.

वेनेज़ुएला का तेल उत्पादन 2000 के बाद से 1.5 मिलियन बैरल प्रति दिन (बीपीडी) कम हो गया है, क्योंकि ये देश अपने पेट्रोलियम उद्योग को बनाए रखने के लिए पर्याप्त निवेश करने में विफल रहा है.

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First published: 8 May 2018, 12:06 IST
 
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