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रूस के क़रीब जाने और चीन को पछाड़ने का मंच है BRICS

नीरज ठाकुर | Updated on: 18 October 2016, 5:08 IST
QUICK PILL
  • भारत ने 2015-16 में चीन को पछाड़ते हुए 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल कर ली. इसके लिए विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मॉनीटरी फंड ने भारत की सराहना की है. चालू वर्ष में भी भारत विकास दर के मामले में चीन को पछाड़ने पर तुला है.
  • इसके बावजूद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत फिलहाल इस स्थिति में नहीं है कि यह किसी भी राजनीतिक और आर्थिक मंच पर चीन को सीधे पटखनी दे सके. 

भारत ने हाल ही में रूस से S-400 ट्रायम्फ डिफेन्स सिस्टम खरीदने की घोषणा की है, जिसकी कीमत 5 अरब डॉलर है. रूस के साथ हुए समझौते के तहत इनकी खरीद, नौसेना उपकरण और कामोव हेलीकॉप्टरों के निर्माण के लिए एक संयुक्त उत्पाद इकाई लगाई जाएगी.

सौदे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘दो नए दोस्तों से एक पुराना दोस्त बेहतर होता है’. यह बयान रूस के चीन और पाक की तरफ हालिया झुकाव को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 

शीत युद्ध के जमाने में भारत भले ही निर्गुट आंदोलन का अग्रणी था लेकिन सोवियत संघ (यूएसएसआर) उसके साथ था. उस समय दुनिया दो बड़े हिस्सों में बंटी थी और अमेरिका साफ तौर पर भारत के खिलाफ था. सोवियत सेना तब भारत के पक्ष में तैयार खड़ी रहती थी. हालांकि 1990 के बाद से भारत ने अमेरिकी फर्मों से व्यापारिक संबंध बढ़ाने शुरू कर दिए. यहीं से अमेरिका के साथ भारत के संबंधों की नई परिभाषा लिखी गई.

भारत-चीन संबंध

भारत ने 2015-16 में चीन को पछाड़ते हुए 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल कर ली. इसके लिए विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मॉनीटरी फंड ने भारत की सराहना की है. चालू वर्ष में भी भारत विकास दर के मामले में चीन को पछाड़ने पर तुला है. इसके बावजूद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत फिलहाल इस स्थिति में नहीं है कि यह किसी भी राजनीतिक और आर्थिक मंच पर चीन को सीधे पटखनी दे सके. 

हाल ही में हम देख चुके हैं कि चीन ने अकेले अपने दम पर भारत की एनएसजी में एंट्री रुकवा दी और संयुक्त राष्ट्र के जैश-ए- मुहम्मद चीफ मौलाना मसूद अजहर को आतंकी सूची में डालने पर भी रोक लगा दी. इससे भारत के अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से वित्तीय सहायता लेने पर मुश्किल आ सकती है.

भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन के खिलाफ तभी बोल सकता है जब वह आर्थिक रूप से चीन के समकक्ष हो. चीन की जीडीपी भारत की सामान्य जीडीपी दर से 5.06 गुना अधिक है. एकसमान बिजली खरीद के परिप्रेक्ष्य में देखें तो चीन की जीडीपी भारत से 2.39 गुना अधिक है. 

भारत और चीन के बीच 70.73 अरब डॉलर की व्यापारिक साझेदारी है. इसमें भारत 52.68 अरब डॉलर के घाटे से जूझ रहा है. इस भारी घाटे को देखते हुए भारत को अधिक सतर्कता के साथ चीन के दुस्साहस से निपटना होगा. खासतौर पर जब वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने अधिकार और कार्यक्षेत्र विस्तार की कोशिश करता दिखाई दे.

लेकिन अगर चीन जैसा देश अपनी अर्थव्यवस्था को दुनिया के सामने सोने की चिडि़या साबित करने और भारत को नीचा दिखाने की कोशिश करता है तो कोई भी इस सोने की चिडि़या को नहीं मारना चाहेगा. 

1990 और 2000 में यह रणनीति चीन के बहुत काम आई थी जब उसने अमेरिका से टक्कर लेने की कोशिश की थी. आज, बहुत से विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अमेरिका से सुपरपावर का तमगा छीन लेना चाहता है. 

पुराने संबंध

भारत को अगर इस रणनीति से फायदा उठाना है तो इसे यह सुनिश्चित करना होगा कि भले ही व्यापार के दरवाजे चीन सहित पूरी दुनिया के लिए खुले रखे लेकिन तरजीह उन्हें ही दे जो जरूरत पड़ने पर भारत के साथ खड़े दिखाई देते हैं.

फिलहाल केवल रूस ऐसा देश है जो अपने वैश्विक राजनीतिक हितों को देखते हुए भारत का साथ देता दिख रहा है. इसी संदर्भ में लगता है मोदी को यह एहसास हो गया है कि चीन का मुकाबला करने के लिए रूस जैसे प्रभावशाली देश का भारत के पक्ष में होना जरूरी है.

हाल ही में रूस, चीन और पाकिस्तान के ज्यादा करीब आया है तो भारत ने अमेरिका का रुख कर लिया लेकिन अमेरिका ने चीन के विरोध के बीच भारतीय हितों का ध्यान नहीं रखा. इसीलिए गोवा में ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच प्रतिनिधि स्तर की वार्ता हुई और कुल 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए. ये करार रक्षा, ऊर्जा, बिजली, जहाज निर्माण और अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए हैं.

कोई भी अर्थव्यवस्था तब तक नंबर वन नहीं बन सकती, जब तक कि वह तकनीकी रूप से समृद्ध नहीं हो. रूस के साथ प्रगाढ़ संबंधों से भारत को गैर मित्र राष्ट्र चीन के साथ निपटने में मदद मिलेगी. लगता है मोदी सही राह पर हैं. वे ब्रिक्स देशों के साथ संबंधों में चतुराई से काम ले रहे हैं.

First published: 18 October 2016, 5:08 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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