Home » बिज़नेस » Income Tax rebate on 3.5 lakh annual income possible
 

आम बजट 2017: जेटली की पोटली से मिडिल क्लास को क्या उम्मीदें हैं?

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 January 2017, 16:20 IST
(ट्विटर)

आम बजट कई मायनों में जनता की उम्मीदों का पिटारा होता है. बजट से समाज के अलग-अलग तबके चाहे वह ग़रीब हों किसान हों या फिर कारोबारी हर किसी की आस लगी होती है. 

वहीं बात अगर मिडिल क्लास की करें तो जेटली की पोटली से वह भी कुछ छूट की उम्मीद कर रहे हैं. मध्यम वर्ग के लिए बजट का मौका खास तौर से इनकम टैक्स स्लैब में छूट से जोड़कर देखा जाता है. 

मौजूदा समय में आयकर छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये है. यानी सालाना ढाई लाख रुपये आमदनी वाले वेतनभोगियों को अभी कोई टैक्स नहीं अदा करना पड़ता है. वहीं सेक्शन 87(ए) में 5,000 तक की अतिरिक्त छूट मिलती है. इसके अलावा सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख तक की छूट मिलती है. 

5 लाख सालाना आय पर टैक्स छूट की आस

जानकारों का अनुमान है कि टैक्स छूट की सीमा 3.5 लाख रुपये की जा सकती है. हालांकि मिडिल क्लास के ज्यादातर लोग इस छूट को 5 लाख रुपये तक करने के पक्ष में हैं. इसके साथ ही 80 सी का स्लैब बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. 

80 सी से पीएफ और होम लोन का प्रिंसपिल रिपेमेंट अलग होने की आस है. वहीं छोटे-छोटे अलाउंस को हटाकर एक स्टैंडर्ड कमी होनी चाहिए. इसके साथ ही 87 ए की छूट 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने और 80 डी की लिमिट बढ़ाने की उम्मीद है.  

मौजूदा वक्त में एनपीएस (नेशल पेंशन स्कीम) में निवेश पर 50,000 तक की अतिरिक्त टैक्स छूट है. सरकार की ओर से मेडिकल रिइंबर्समेंट की लिमिट सालाना 15,000 है. वहीं 19,200 रुपये सालाना की लिमिट कंवेयंस अलाउंस के तौर पर मिलती है. 

सर्विस टैक्स न बढ़े 

आम तौर पर हर बार बजट में सर्विस टैक्स कुछ न कुछ बढ़ता है. अभी जनता पर 15 फीसदी सर्विस टैक्स का बोझ है. जिससे होटल, रेस्त्रां, फ्लाइट और कई बिल वाली सेवाओं पर टैक्स देना पड़ता है. केंद्र सरकार ने एक जुलाई या एक अक्टूबर से जीएसटी लागू करने का लक्ष्य तय किया है. 

ऐसे में विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इसे सरकार बढ़ाकर 16 फीसदी तक कर सकती है. हालांकि मध्यम वर्ग उम्मीद लगाए बैठा है कि इसे वर्तमान सीमा तक ही रखा जाए.

डिजिटल लेन-देन सस्ता हो

नोटबंदी के बाद बजट में डिजिटल लेन-देन में इजाफा हुआ है. ऐसे में मिडिल क्लास के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इसे सस्ता किया जाए. मिडिल क्लास के लोग चाहते हैं कि पीओएस मशीन से एमडीआर चार्ज हटाया जाये. 

इसके साथ ही डिजिटल लेन-देन करने पर अलग से इंसेंटिव मिलने की भी उनकी चाहत है. 2015-16 के लेबर ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक 18-29 साल के 13.2 फीसदी लोगों के पास नौकरी नहीं है. ऐसे में रोजगार के नए मौके मुहैया कराए जाने की भी जेटली की पोटली से आस है.

First published: 31 January 2017, 16:20 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी