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Budget 2019: मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में जनता को दिए ये तोहफे

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 July 2019, 8:03 IST

मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का आज पहला बजट पेश करेगी. आम जन को मोदी सरकार के इस बजट से तमाम उम्मीदें हैं. क्योंकि पूर्ण बहुमत के साथ दूसरी बार सत्ता में आई बीजेपी से अब लोगों को पहले से अधिक उम्मीदें हैं. आज हम आपको मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में पेश हुए बजट की कुछ अहम घोषणाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने आम लोगों को राहत दी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना पहला बजट पेश कर रही है. जानकारों का मानना है कि इस बजट में मोदी सरकार इंफ्रा के साथ, स्वास्थ्य, किसान और रियल्टी सेक्टर पर ज्यादा फोकस कर सकती है, हालांकि मोदी सरकार के अपने पहले कार्यकाल में आम लोगों को कई तरह की छूट दी थीं.

मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में टैक्स छूट सीमा को बढ़ा दिया. लोकसभा चुनाव 2014 के बाद जुलाई में तत्तकालीन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जब बजट पेश किया तब बेसिक टैक्स छू की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख कर दी. वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए ये सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर 3 लाख कर दी थी.

वहीं सेक्शन 80(C) के तहत छूट सीमा 1.1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी गई. सेक्शन 24 के तहत होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़कर 2 लाख रुपये हो गई.

उसके बाद 2015-16 के बजट में पेंशन स्कीम को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया. मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के दूसरे बजट में इनकम टैक्स स्लैब्स और रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) को और भी आकर्षक बनाने का काम किया.

सेक्शन 80CCD(1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50 हजार रुपये की टैक्स छूट की घोषणा की गई. वहीं सेक्शन 80C और 80CCD(1b) को मिलाकर अब 2 लाख रुपये के टैक्स छूट का लाभ मिलने लगा. इसके अलावा सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश पर मिलने वाले ब्याज को टैक्स फ्री कर दिया गया.

वहीं इंडिविजुअल्स के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन लिमिट 15 हजार रुपये से बढ़कर 25 हजार रुपये कर दी गई. वहीं वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह सीमा 20 हजार रुपये से बढ़कर 30 हजार रुपये कर दी गई. साथ ही सैलरीड क्लास का ट्रांसपोर्ट अलाउंस लिमिट 800 रुपये से बढ़ाकप 1600 रुपये प्रति माह कर दिया गया. 1 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले इंडिविजुअल्स पर सरचार्ज 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया.

उसके बाद साल 2016-17 के बजट में घर के किराए पर टैक्स छूट बढ़ा दी गई. तत्कालीन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मोदी सरकार में अपना तीसरा बजट पेश किया. इसमें भी टैक्स स्लैब्स और रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे कम आय वालों को थोड़ी राहत मिली.

5 लाख से कम आय वालों के लिए टैक्स रिबेट 2000 से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया. नए होम बायर्स को 35 लाख रुपये तक के लोन पर चुकाए जाने वाले ब्याज के लिए अतिरिक्त 50,000 रुपये की टैक्स छूट दी गई.

इसके अलावा घर का किराया देने वालों के लिए सेक्शन 80GG के तहत टैक्स छूट को 24,000 से बढ़ाकर 60,000 रुपये किया गया. 1 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले इंडिविजुअल्स पर सरचार्ज 3 फीसदी बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया.

2017-18 के बजट में टैक्स रेट में कमी की गई. वित्त मंत्री जेटली ने 5 लाख से कम सालाना आय वालों के लिए राहत की घोषणा की. टैक्स में छूट की सीमा 2.5 लाख से 5 लाख रुपये कर दी गई. साथ ही इनकम टैक्स रेट को 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया गया.

सभी टैक्सपेयर्स को 12,500 रुपये का टैक्स रिबेट दिया गया. 50 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये की सालाना आय वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज का प्रावधान किया गया. अपने आखिरी बजट में जेटली ने एलटीसीजी पर लगाया टैक्स मोदी सरकार में वित्त मंत्री के तौर पर अरुण जेटली ने अंतिम बार 2018-19 का बजट पेश किया था. इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया.

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First published: 5 July 2019, 8:03 IST
 
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