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Union Budget 2019: चीन और पाकिस्तान से मुकाबले के लिए बजट पर है सेना की नजर

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 July 2019, 8:30 IST

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन आज पेश होने वाले बजट में सरकारी वित्त के कारण रक्षा खर्च में मामूली वृद्धि की कर सकती है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट की माने तो अधिकारियों ने कहा कि एक लंबे समय से नियोजित सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम में और देरी हो रही है. भारत की वायु सेना को अपने सोवियत युग के विमानों को बदलने के लिए सैकड़ों लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों की सख्त आवश्यकता है, जबकि नौसेना ने हिंद महासागर में चीनी नौसेना की बढ़ती उपस्थिति का मुकाबला करने के लिए एक दर्जन से अधिक पनडुब्बियों की योजना बनाई है.

सेना के लिए इन उपकरणों की योजनाएं वर्षों से अटकी हुई हैं क्योंकि सरकारें बड़ी रकम निर्धारित नहीं कर पाई हैं और ज्यादातर रक्षा खर्च 1.4 मिलियन स्थायी सेना के लिए वेतन और पेंशन पर जाता है, जो चीन के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना है. लोकसभा चुनावों से पहले फरवरी में घोषित अंतरिम बजट में सरकार ने रक्षा के लिए 4.31 ट्रिलियन ($ 62.27 बिलियन) का आवंटन किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि है, लेकिन यह आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा है.

 

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने रायटर को बताया कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करते समय उस आवंटन में कोई बदलाव नहीं होने की संभावना थी. बजट की तैयारियों में शामिल अधिकारी ने कहा, "रक्षा हमारा प्रमुख खर्च है और हम इसे उतना ही देते हैं जितना बजट की अनुमति देता है. लेकिन इस साल जो पहले ही आवंटित किया जा चुका है उसमे एक महत्वपूर्ण वृद्धि मुश्किल है."

चीन ने बढाया बजट

भारत के विपरीत चीन ने मार्च में लगभग 180 बिलियन डॉलर के रक्षा खर्च की घोषणा की, जो 2018 में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि और आर्थिक विकास लक्ष्य की तुलना में तेज़ी से बढ़ा है. चूंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2012 के बाद पदभार संभाला था, इसलिए उन्होंने सेना को अपने नीतिगत मंच का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा मजबूत और आधुनिक बनाया है.

First published: 5 July 2019, 7:38 IST
 
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