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बुलेट की राह में गोदरेज ग्रुप ने डाला ऐसा अड़ंगा कि बदलना पड़ सकता है रास्ता

सुनील रावत | Updated on: 9 July 2018, 16:06 IST

1.08 ट्रिलियन की लागत वाली बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए पहले ही लगभग 7,000 किसान, 15,000 परिवार या 60,000 लोग जमीन दे चुके हैं. जिनमे से बड़ी संख्या में विरोध करने वालों की संख्या भी है. अब इस सूचि में गोदरेज समूह भी शामिल हो गया है. जिसने अपनी 5 अरब रुपये से अधिक की विक्रोली स्थित जमीन अधिग्रहण के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

अब सबसे बड़ी मुसीबत बुलेट ट्रैन की राह में यह है कि अगर गोदरेज अधिग्रहण से सहमत नहीं होते है तो अधिकारियों को या तो ट्रैक का रास्ता बदलना होगा या जबरन जमीन का अधिग्रह करना होगा. इसी साल मार्च में महाराष्ट् सरकार ने जापान समर्थित मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण के लिए बिकरौली में जमीन का चयन किया था.

जमीन अधिग्रहण करने में राज्य की सीमा के अंदर यह आखिरी जमीन थी. जिसके बाद मुंबई उपनगरीय कलेक्टर कार्यालय ने अधिग्रहण के लिए जमीन के मालिक गोदरेज समूह को लिखा था लेकिन अब बुलेट प्रोजेक्ट लिए यह जमीन बाधा बन गई है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार इस जमीन की कीमत 5 अरब रुपये से अधिक है. मुंबई और अहमदाबाद के बीच कुल 508 किमी के बुलेट ट्रेन ट्रैक में से 21 किमी मुंबई में भूमिगत है. गोदरेज की जमीन उस जगह है जहां ट्रेन टनल में प्रवेश करेगी. जमीन का उपयोग वेंटिलेशन डक्ट्स के लिए किया जाएगा.

एक सरकारी अधिकारी का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि गोदरेज परियोजना संरेखण (alignment) में बदलाव की मांग कर रहे हैं ताकि लगभग 3.5 हेक्टेयर या 8.6 एकड़ जमीन में अपनी कंस्ट्रक्शन परियोजना का निर्माण कर सके.

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए जमीन को लेकर गोदरेज नई बाधा के रूप में सामने आये हैं. जबकि बुलेट ट्रैन प्रोजेक्ट को सरकार अगस्त 2022 तक पूरा करना चाहती है. इस प्रोजेट को किसानों विशेष रूप से महाराष्ट्र के पालघर जिले में विरोध का सामना करना पड़ा है.

भारतीय रेलवे 10,000 करोड़ रुपये की लागत से महाराष्ट्र और गुजरात में लगभग 1,400 हेक्टेयर रैखिक भूमि अधिग्रहण कर रही है. भारत की पहली हाई स्पीड ट्रेन परियोजना के लिए निर्माण जनवरी 2019 में शुरू होना था और भूमि अधिग्रहण की समयसीमा इस वर्ष के अंत तक है.

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First published: 9 July 2018, 15:59 IST
 
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