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विनिवेश की गाड़ी पर सवार सरकार, एनबीसीसी की 15% हिस्सेदारी बेचेगी

अभिषेक पराशर | Updated on: 14 July 2016, 7:45 IST
QUICK PILL
  • बाजार की बेहतर स्थिति को देखते हुए सरकार विनिवेश की योजना पर तेजी से आगे बढ़ रही है. एसयूयूटीआई की अपनी हिस्सेदारी बेचने के फैसले के बाद अब मोदी सरकार ने एनबीसीसी की 15 फीसदी हिस्सेदारी बेचे जाने को मंजूरी दी है.
  • एनबीसीसी की 15 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री से सरकार को करीब 1,706 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. कंपनी में सरकार की 90 फीसदी हिस्सेदारी है.
  • सेंसेक्स फिलहाल 27,815.18 के स्तर पर है. पिछले पांच महीनों में सेंसेक्स में करीब 21 फीसदी की तेजी आई है और यह सरकार के लिए विनिवेश का सबसे मुफीद समय है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड की 15 फीसदी हिस्सेदारी बेचे जाने की मंजूरी दे दी गई है. एनबीसीसी में सरकार की 90 फीसदी हिस्सेदारी है.

एनबीसीसी की 15 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री से सरकार को करीब 1,706 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है. सरकार को एनबीसीसी के निवेश से कितनी रकम मिलेगी, यह विनिवेश के समय बाजार की हालत और निवेशकों की रुचि पर निर्भर करेगा.

सरकार ने एनबीसीसी के इच्छुक कर्मचारियों को ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस में 5 फीसदी छूट भी देने का फैसला लिया है.

बेहतर माहौल से उत्साहित सरकार

बाजार की खराब स्थिति की वजह से सरकार इससे पहले विनिवेश की दिशा में तेज गति से आगे बढ़ने से बच रही थी. लेकिन अब बाजार की बेहतर स्थिति ने सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ने का हौसला दिया है. 

सेंसेक्स फिलहाल 27,815.18 के स्तर पर है. पिछले पांच महीनों में सेंसेक्स में करीब 21 फीसदी की तेजी आई है और यह सरकार के लिए विनिवेश की दिशा में आगे बढ़ने का सही समय है. 

मौजूदा बाजार स्थिति में सरकार को लिस्टेड और अन लिस्टेड कंपनियों में मौजूद अपनी हिस्सेदारी की बेहतर कीमत मिलेगी.

ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलने से पैदा हुई आशंकाओं से बाजार में जारी अनिश्चितता भी अब खत्म हो चुकी है. ब्रेग्जिट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में आई मजबूती से यह बात साफ हो चुकी है कि बाजार ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से बाहर होने के बाद के जोखिम को पचा चुका है. 

हाल ही में मोदी सरकार ने कई सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों में मौजूद सरकार की हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है. एसयूयूटीआई (यूटीआई की विशेष अंडरटेकिंग) के जरिये सरकार इन सभी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है. 

खबरों के मुताबिक सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से एसयूयूटीआई की हिस्सेदारी खरीदने को कहा है.

खबरों के मुताबिक सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से एसयूयूटीआई की हिस्सेदारी खरीदने को कहा है.

एसयूयूटीआई की हिस्सेदारी खरीदने के लिए एलआईसी करीब 25,000 से 30,000 रुपये खर्च करेगी. इससे पहले भी कई मौकों पर एलआईसी ने सरकार के विनिवेश लक्ष्यों को पूरा करने में मदद की है.

हालांकि कुछ महीनों पहले तक सरकार यह कहती रही थी कि उसे इन कंपनियों में मौजूद अपनी हिस्ससेदारी बेचने की कोई जल्दबाजी नहीं है. लेकिन बाजार में निवेशकों के लौटने के साथ ही सरकार की रणनीति बदल गई है.

एसयूयूटीआई की 43 लिस्टेड जबकि 8 अनलिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी है. कंपनी आईटीसी में 11.17 फीसदी जबकि लार्सन एंड टुब्रो में 8.32 फीसदी हिस्सेदारी रखती है. एक्सिस बैंक में इसकी हिस्सेदारी 11.93 फीसदी है.

मार्च 2014 में सरकार ने ऐक्सिस बैंक की 9 फीसदी हिस्सेदारी करीब 5,500 करोड़ रुपये में बेच दी थी. इसके अलावा कंपनी आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, टाटा मोटर्स लिमिटेड और सन फॉर्मास्यूटिकल्स लिमिटेड में भी हिस्सेदारी रखती है.

विनिवेश लक्ष्य पर नजर

सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17 में विनिवेश के जरिये 56,500 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है. 

56,500 करोड़ रुपये में से 36,000 करोड़ रुपये की रकम पब्लिक एंटरप्राइजेज में मौजूद सरकार की अल्पांश हिस्सेदारी को बेचकर जुटाई जानी है जबकि बाकी की 20,500 करोड़ रुपये की रकम मुनाफा और घाटा उठा रही पीएसयू की हिस्सेदारी को बेचकर जुटाई जानी है.

मौजूदा वित्त वर्ष में सरकार एनएचपीसी की हिस्सेदारी बिक्री से करीब 2,716 करोड़ रुपये की रकम जुटा चुकी है.

सरकार एनएचपीसी की हिस्सेदारी बिक्री से करीब 2,716 करोड़ रुपये की रकम जुटा चुकी है.

एनबीसीसी शहरी विकास मंत्रालय के तहत काम करने वाली कंपनी है जो कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट से जुड़ी परियोजनाओं में काम करती है. कंपनी कंसल्टेंसी सेवा भी मुहैया कराती है. कंपनी में सरकार की 90 फीसदी हिस्सेदारी है. शेयरों की संख्या के लिहाज से उसके पास 54,00,00,000  शेयर है और इनका फेस वैल्यू 2 रुपये प्रति शेयर है. बाकी की 10 फीसदी हिस्सेदारी सार्वजनिक है. 

सरकार ने मार्च 2012 में एनबीसीसी के आईपीओ को पेश किया था. कंपनी के आईपीओ से सरकार को 124.97 करोड़ रुपये मिले थे.

विनिवेश की खबर से धाराशायी हुअा शेयर

एनबीसीसी में सरकार की हिस्सेदारी घटाए जाने की अटकलों पर बाजार ने उल्टी प्रतिक्रिया दी है. बुधवार को बीएसई में कंपनी का शेयर करीब 11 फीसदी टूटकर 229.80 पर बंद हुआ. 

एनबीसीसी, एसऐंडपी, बीएसई रियल्टी इंडेक्स में सबसे अधिक टूटने वाला शेयर रहा. कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 14,300 करोड़ रुपये है. 

मार्च तिमाही में कंपनी के मुनाफे में सालाना आधार पर 5.86 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी. कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा 141.47 करोड़ रुपये रहा था. साथ ही उसकी बिक्री में करीब 26 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी.

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने साथ ही डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जिसके तहत आईटीआई लिमिटेड के शेयरों को स्पेशल नेशनल इनवेस्टमेंट फंड (एसएनआईएफ) को ट्रांसफर किया जाना है ताकि सेबी के दिशानिर्देशों के तहत कंपनी में न्यूनततम सार्वजनिक हिस्सेदारी के दिशानिर्देशों को पूरा किया जा सके.

अगस्त 2017 तक आईटीआई में सार्वजनिक हिस्सेदारी को बढ़ाकर 25 फीसदी कर लिया जाएगा. हालांकि आईटीआई के विनिवेश की अटकलों के बीच इसके शेयर बीएसई में 18.78 फीसदी मजबूत होकर 34.15 रुपये पर बंद हुआ.

First published: 14 July 2016, 7:45 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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