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92 साल पुरानी रेल बजट की परंपरा खत्म, 2017 में होगा देश का एक बजट

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 September 2016, 13:05 IST
(पत्रिका)

अब तक आम बजट और रेल बजट अलग-अलग पेश होते रहे हैं. संसदीय परंपरा के मुताबिक पहले रेल बजट पेश किया जाता है. इसके बाद बारी आती है इकॉनॉमिक सर्वे (आर्थिक सर्वेक्षण) की और आखिर में आम बजट पेश होता है.

लेकिन अब रेल बजट इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा, क्योंकि केंद्रीय कैबिनेट ने रेल बजट को आम बजट का ही हिस्सा बनाकर पेश किए जाने पर अपनी मुहर लगा दी है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कैबिनेट के इस अहम फैसले की जानकारी दी.  

वित्त मंत्री जेटली ने दी जानकारी

दिल्ली में आज मोदी कैबिनेट की अहम बैठक हुई. इस दौरान अगले साल आम बजट के साथ ही रेल बजट को पेश करने के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है. इसके साथ ही रेल बजट भारत की संसदीय प्रणाली के इतिहास में अतीत का हिस्सा बन गया है.

वित्त मंत्री अरुण जेटली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "1924 में यह परंपरा शुरू हुई थी. नीति आयोग ने इस बारे में एक कमेटी बनाई थी. जिसने अपनी रिपोर्ट में रेल बजट और आम बजट को एक करने की सलाह दी." 

'काम में स्वायत्तता बरकार रहेगी'

वित्त मंत्री जेटली ने रेल बजट के विलय की जानकारी देते हुए कहा, "रेल बजट और आम बजट अब मिलाकर होगा. देश का केवल एक बजट होगा." इस दौरान रेल मंत्री सुरेश प्रभु भी उनके साथ मौजूद रहे.

हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह भी कहा कि रेल मंत्रालय की स्वायत्तता में कोई दखल नहीं होगा. जेटली ने कहा, "एक बजट होने के बावजूद इसकी (रेल बजट) कार्यात्मक स्वतंत्रता को बरकरार रखा जाएगा." जेटली ने इस दौरान यह भी कहा कि रेलवे के खर्च पर अलग से चर्चा की जाएगी.

1924 में पहला रेल बजट

केंद्र सरकार ने रेलवे बजट को हर साल संसद में अलग से पेश करने की दशकों पुरानी प्रथा को खत्म करने का फैसला लिया है. अब अगले वित्त वर्ष से रेल बजट आम बजट के साथ ही पेश किया जाएगा.

इसके साथ ही 92 साल से चली आ रही परंपरा को 2017 में खत्म हो जाएगी. पहली बार रेल बजट 1924 में पेश किया गया था.

रेल बजट को अलग पेश न करने और आम बजट का हिस्सा बनाने पर वित्त मंत्रालय पहले ही राजी हो गया था. वित्त मंत्रालय ने सही फैसले पर पहुंचने के लिए पांच सदस्यों की टीम बनाई थी.

टीम की रिपोर्ट पर ही अंतिम रूप से यह निर्णय लिया गया है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी राज्यसभा में कहा था कि उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली से रेल बजट को खत्म करने को कहा है. प्रभु ने कहा था कि इससे आने वाले वक्त में देश को आर्थिक फायदा होगा.

रेल बजट का लंबा इतिहास

  • साल 1859 से पहले ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में बजट नाम की कोई भी चीज नहीं थी. उसी साल ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड केनिंग ने अपनी कार्यकारिणी में जेम्स विल्सन को बतौर वित्त सदस्य नियुक्त किया.
  • विल्सन की पहल पर 18 फरवरी 1860 को वायसराय की परिषद में पहली बार बजट पेश किया गया. इस बजट में रेलवे का लेखा-जोखा भी शामिल था. जेम्स विल्सन को ही भारत में बजट प्रणाली का जन्मदाता कहा जाता है.
  • रेल बजट का भी एक लंबा इतिहास है. अंग्रेजी राज के समय से ही रेल बजट को पेश करने की परम्परा शुरू हो गई थी.
  • भारतीय रेल बजट एक विशेष बजट है जो आम बजट से बिलकुल अलग है. सर्वप्रथम 10 सदस्यीय एकवर्थ समिति की अनुशंसा पर 1924 में इसे पेश किया गया था.
  • साल 1921 में ईस्ट इंडिया रेलवे कमेटी के चेयरमैन सर विलियम एक्वर्थ ने यह देखा कि पूरे रेलवे सिस्टम को एक बेहतर मैनेजमेंट की जरूरत है.
  • साल 1924 में उन्होंने आम बजट से रेल बजट को अलग करने का प्रस्ताव रखा. इसके लिए साल 1920-21 में एक दस सदस्यों वाली समिति बनाई गई. यह समिति ब्रिटिश अर्थशास्त्री विलियम एम एक्वर्थ के नेतृत्व में बनी.
  • एक्वर्थ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में रेल बजट को सामान्य बजट से अलग पेश करने का सुझाव दिया क्योंकि, अकेला रेल विभाग भारत की सबसे बड़ी आर्थिक गतिविधियों का संचालन करता था.
  • साल 1924 में पूरे देश के बजट में रेल बजट की हिस्सेदारी 70 फीसदी थी. देश के बजट में रेल बजट की इतनी अधिक हिस्सेदारी देखकर रेल बजट को आम बजट से अलग करने का विलियम का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया.
  • जब साल 1924 में रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया था, उस समय रेलवे का प्रयोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 75 फीसदी और माल ढुलाई में 90 फीसदी तक होता था.
  • यद्यपि भारतीय संविधान में कहीं भी रेल बजट जैसे शब्द का वर्णन नहीं है. इसे संविधान के अनुच्छेद 112 और 204 के अंतर्गत ही लोकसभा में पेश और पास किया जाता है.
  • आम तौर पर रेल बजट आम बजट से कुछ दिन पहले पेश किया जाता है. इसमें पिछले वित्त वर्ष का आर्थिक सर्वेक्षण भी किया जाता है.
  • भारतीय रेल, भारत में एक सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (पीएसयू) है. यह लगभग 13.6 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करती है.
  • बिहार के भूतपूर्व मुख्य मंत्री लालू प्रसाद यादव के नाम लगातार 6 बार रेल बजट प्रस्तुत करने का रिकॉर्ड है. वे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में 2004 -2009 के बीच रेल मंत्री थे.
  • ममता बनर्जी रेल बजट पेश करने वाली पहली महिला रेल मंत्री हैं. साल 2002 में उन्होंने रेल बजट प्रस्तुत किया था.
First published: 21 September 2016, 13:05 IST
 
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