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आरबीआई के रेपो रेट की दरें कम होने से सुधरेगी अर्थव्यवस्था?

नीरज ठाकुर | Updated on: 5 April 2016, 20:36 IST
QUICK PILL
  • भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट की दरों में कटौती की है. उम्मीद की जा रही है कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्ता में सुधार आएगा.
  • रेपो रेट में कटौती अर्थव्यस्था में सुधार के लिए पर्याप्त नहीं. अच्छा मॉनसून और आधारभूत क्षेत्र में निवेश की जरूरत.

आम भारतीयों को उम्मीद थी कि भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) रेपो रेट कम करेगा जिससे बैंकों की ब्याज दरें कम होंगी.

मंगलवार को आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट(0.25 प्रतिशत) की  कटौती की घोषणा की है. इस कटौती के बाद आरबीआई का रेपो रेट 6.50 प्रतिशत हो गया है. रेपो रेट वो दर है जिसपर कारोबारी बैंक रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं.

आरबीआई ने दैनिक कैश रिजर्व रेशियो(सीआरआर) की दर 95 प्रतिशत से घटाकर 90 प्रतिशत कर दी है.

आरबीआई ने खुले बाजार से बैंकिंग क्षेत्र में 15 हजार करोड़ रुपये के निवेश की भी घोषणा की है.

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वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने अपने एक बयान में कहा है कि आरबीआई की इस घोषणा से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. लेकिन क्या सचमुच ऐसा होगा?

भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की घोषणा की है

इससे पहले सरकार ने हाल ही में लघु बचत योजना पर मिलने वाली ब्याज में 1.3 प्रतिशत की कटौती की थी. ऐसे में रेपो रेट में की गयी कमी से आम लोगों को कितनी राहत मिलेगी?

अर्थव्यवस्था में मांग 'चीजों की कीमत' और लोगों के क्रय क्षमता से तय होती है. पिछले दो सालों में लोगों की क्रय शक्ति घटी है. इसके लिए निम्न कारण मुख्य तौर पर जिम्मेदार हैं-

1) आय में कमी

2) ऊंची ब्याज दर

3) लगातार सूखा पड़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आई गिरावट

4) नई नौकरियों का अभाव

अर्थव्यवस्था में मंदी लाने वाले इन चार कारणों में से केवल दूसरे में आरबीआई मदद कर सकता है. दो साल पहले मुद्रा स्फिति को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई ने ब्याज दरें बढ़ायी थीं. आरबीआई की कोशिश रहती है कि मुद्रा स्फिति की दर चार प्रतिशत तक रहे.

केवल रेपो रेट में कटौती से नहीं सुधरेगी अर्थव्यस्था, इसके लिए अच्छा मॉनसून और निवेश जरूरी

इस साल फरवरी में उपभोक्ता स्फिति दर 5.18 प्रतिशत रही. पिछले 16 महीनों में खाद्य पदार्थों और थोक बाजार मूल्य की विकास दर नकारात्मक रही है. ऐसे में उम्मीद की जा रही थी आरबीआई ब्याज दरें घटाएंगे.

क्या ये कटौती काफी है?


आरबीआई की घोषणा के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज(बीएसई) में 537 अंकों की गिरावट दर्ज की गयी. ये गिरावट सभी सेक्टर के शेयरो में देखी गयी.

भारतीय अर्थव्यवस्था को इस वक्त सबसे ज्यादा जरूरत अच्छे मॉनसून की है. लगातार दो सालों से सूखा पड़ने की वजह से लोगों की कर्ज लेने की क्षमता में कमी आयी है.

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जब अर्थव्यवस्था बेहतरी हालत में हो और लोगों के पास पैसा हो तो वो लोन लेने से परहेज नहीं करते.

इसके अलावा अगर सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश करती है तो उससे भी बाजार में मांग बढ़ेगी.

ये साफ है कि अर्थव्यवस्था को उबारने में आरबीआई की भूमिका सीमित है. ये भी देखना होगा कि आरबीआई से बैंकों को मिलने वाली छूट क्या आम लोगों तक भी पहुंचेगी?

First published: 5 April 2016, 20:36 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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