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चुनावों से पहले कैश सर्कुलेशन अपने रिकॉर्ड स्तर पर, 21.41 लाख करोड़ के पार

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 March 2019, 8:39 IST

देश की अर्थव्यवस्था में कैश सर्कुलेशन अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. कैश सर्कुलेशन नोटबंदी से पहले 17.97 लाख करोड़ रुपये था, जिसमे 15 मार्च, 2019 तक 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और अब ये 21.41 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, डिजिटल लेनदेन में वृद्धि के बावजूद कैश सर्कुलेशन ने मार्च 2018 में 18.29 लाख करोड़ रुपये से पिछले एक वर्ष में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि की है.

नवंबर 2016 में 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों को सिस्टम से हटाए जाने के बाद जनवरी 2017 में सर्कुलेशन लगभग 9 लाख करोड़ रुपये गिर गया था. नोटबंदी से पहले कहा जा रहा था कि नकदी के उच्च स्तर, जाली नोटों और काले धन को इससे रोका जा सकेगा. बैंकरों के अनुसार, आम तौर पर चुनावों से पहले प्रणाली में नकदी बढ़ जाती है. मॉनसून के बाद मुद्रा की मांग भी बढ़ जाती है क्योंकि रबी की बुआई के बाद अक्टूबर में कटाई शुरू होती है, अंततः नकदी की आवश्यकता होती है. त्योहारी सीजन अपनी प्राकृतिक मांग भी है जो सोने, ऑटोमोबाइल की खरीद के साथ बढ़ जाता है, जिससे मुद्रा की मांग बढ़ जाती है.

8 नवंबर 2016 को 500 और 1,000 रुपये के नोटों को प्रचलन से हटा लेने के बाद, 2018 के लिए RBI की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया था कि लगभग सभी नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गए है. एटीएम के माध्यम से नकद लेनदेन भी लगातार बढ़ रहे है. आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2017 में 200,648 करोड़ रुपये से, एटीएम और पॉइंट ऑफ़ सेल (PoS) टर्मिनलों के जरिए डेबिट कार्ड का लेनदेन जनवरी 2018 में बढ़कर 295,783 करोड़ रुपये और जनवरी 2019 में 316,808 करोड़ रुपये हो गया.

3.16 लाख करोड़ रुपये के डेबिट कार्ड लेनदेन में से एटीएम के माध्यम से 2.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी हुई. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का उपयोग करके किए गए मासिक लेनदेन का मूल्य पहली बार दिसंबर 2018 में 1 लाख करोड़ रुपये के पार हो गया. आरबीआई का कहना है कि खुदरा भुगतान 2017-18 के दौरान मात्रा में लगभग 45 प्रतिशत और मूल्य में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

First published: 22 March 2019, 8:36 IST
 
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