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Videocon-ICICI Case: दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के चेयरमैन के खिलाफ CBI ने दर्ज की प्राथमिकी

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 March 2018, 10:36 IST

सीबीआई ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन ग्रुप के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के खिलाफ प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज की है. चंदा कोचर पर पति के दोस्त की कंपनी को लोन देने के आरोप हैं. वहीं विसलब्लोअर अरविंद गुप्ता का कहना है कि इस बात के पुख्ता सबूत मौजूद हैं कि इस लोन से चंदा कोचर और उनके परिवार को बड़ा लाभ मिला है.

रिपोर्ट के अनुसार वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत 2008 में चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल्स में निवेशक थे, हालांकि बाद में उन्होंने अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी. वर्तमान में देश के कार्पोरेट और बैंकों की मिलीभगत को लेक बड़े-बड़े चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. बता दें कि 2017 में यह यह लोन एनपीए घोषित कर दिया गया था.

सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सीबीआई इस आरोप की जांच करेगी कि क्या विडियोकॉन के धूत ने आईसीआईसीआई बैंक से लोन लेने के बाद दीपक कोचर की कंपनी को करोड़ों रुपये दिए थे. बता दें कि वीडियोकॉन को 2012 में आईसीआईसीआई बैंक से 3,250 करोड़ रुपये का लोन मिला था. यह लोन कुल 40 हजार करोड़ रुपये का एक हिस्सा था जिसे वीडियोकॉन ग्रुप ने एसबीआई के नेतृत्व में 20 बैंकों से लिया था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि खुद को वीडियोकॉन ग्रुप और आईसीआईसीआई बैंक में सतर्क निवेशक शेयरधारक के रूप में पेश करने वाले अरविंद गुप्ता ने 15 मार्च 2016 को प्रधानमंत्री कार्यालय को एक पत्र लिखा था. इस पत्र में में साफ़ कहा गया था कि वीडियोकॉन ग्रुप के मैनेजर वेणुगोपाल धूत और आईसीआईसीआई बैंक के एमडी और सीईओ चंदा कोचर के परिवार के स्वामित्व वाली न्यूपॉवर रिन्यूएबल ग्रुप के बीच अवैध बैंकिंग और व्यावसायिक संबंध है.

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अपने पत्र में गुप्ता ने एक एनेक्सर जोड़ा है जिसमें आईसीआईसीआई बैंक के सीईओ और प्रबंध निदेशक के बीच सांठगांठ से संबंधित घटनाओं का विवरण है. इसमें विशेषकर वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत का जिक्र किया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार वीडियोकॉन ने 2014 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भारतीय जनता पार्टी को 111 करोड़ रुपये (11.1 करोड़ रुपये), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 0.5 करोड़ रुपये, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 5 करोड़ रुपये के भुगतान की बात कही है. जबकि 2013 में वीडियोकॉन ने भारतीय जनता पार्टी को 0.1 करोड़ रुपये और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 1 करोड़ रुपये का भुगतान किया था. 2013 की वार्षिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले वर्ष में पार्टी ने बिहार प्रदेश जनता दल (यूनाईटेड) को 0.3 करोड़ रुपये का भुगतान किया था.

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सूत्रों ने बताया कि एक महीने पहले दर्ज हुई पीई में दीपक कोचर और धूत का ही नाम है चंदा कोचर का नहीं. हालांकि, पीई में 'अज्ञात बैंक अधिकारियों' का जिक्र किया गया है. करप्शन या फ्रॉड के मामले में जांच का पहला कदम प्रिलिमिनरी इन्कॉयरी (PE) ही होता है. प्रक्रिया का पालन करते हुए सीबीआई यह जानने की कोशिश करेगी कि क्या पहली नजर में एफआईआर दर्ज करने लायक मामला है या नहीं.

अगर जांच में यह पाया जाता है कि केस रजिस्टर करने का कोई खास आधार नहीं है तो सीबीआई डायरेक्टर के अप्रूवल के बाद पीई बंद कर दी जाती है. पीई के रूप में दर्ज किसी जांच को पूरा करने के कोई समयसीमा नहीं होती है. सीबीआई ने विडियोकॉन के कुल 40 हजार करोड़ के लोन और दीपक कोचर और धूत की NRPL के डॉक्युमेंट्स जुटा लिए हैं.

First published: 31 March 2018, 10:36 IST
 
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