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छत्तीसगढ़ विद्युत विभाग: घर में अंधियारा, हरियाणा में ढिंढोरा

शिरीष खरे | Updated on: 1 February 2016, 18:15 IST
QUICK PILL
  • केंद्र सरकार 365 किमी लंबी लाइन के लिए खर्च करेगी 1200 करोड़ रुपए. इसके जरिए छत्तीसगढ़ में उत्पन्न हो रही बिजली हरियाणा को सप्लाई की जाएगी.
  • \'पाबर हब\' छत्तीसगढ़ के 1200 गांव आज भी लालटेन युग में जीने को अभिशप्त हैं. नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के कई इलाकों में विद्युतीकरण की योजना पहुंची ही नहीं है.

एक तरफ प्रदेश के 1200 से ज्यादा गांवों में अंधेरा है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ से हरियाणा तक बिजली पहुंचाने के लिए नई ट्रांसमिशन लाइन बिछाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है. पिछले महीने असम से आगरा की ट्रांसमिशन लाइन पूरी करने के बाद अब ऊर्जा मंत्रालय ने अप्रैल 2016 तक छत्तीसगढ़ से हरियाणा की ट्रांसमिशन लाइन जोड़ने का लक्ष्य रखा है.

बिजली महकमे के अधिकारियों का कहना है कि अति उच्च दाब लाइन से जुड़ने के बाद अपनी आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन करने वाला छत्तीसगढ़ दूसरों राज्यों तक आसानी से बिजली पहुंचा सकता है. मगर एक हकीकत यह भी है कि राज्य बनने के डेढ़ दशक बाद भी सरप्लस स्टेट में आबादी का एक बड़ा हिस्सा आज भी लालटेन युग में जी रहा है.

अपनी आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन करने वाला छत्तीसगढ़ दूसरों राज्यों तक आसानी से बिजली पहुंचा सकता है

ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक इन दो राज्यों के बीच 365 किमी लंबी ट्रांसमिशन लाइन जोड़ने में करीब 1200 करोड़ रुपए खर्च होंगे. योजना के अनुसार अगले साल अप्रैल तक छह हजार मेगावाट क्षमता की ट्रांसमिशन लाइन स्थापित की जानी है. राज्य विद्युत विभाग के अधिकारी ने बताया कि इसमें एचवीडीसी (हाइ वोल्टेज डायरेक्ट कंरेट) ट्रांसमिशन लाइन का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके चलते ग्रिड संचालन बेहतर हो सकेगा.

साथ ही विद्युत मंत्रालय का यह भी दावा है कि ऊर्जा हस्तांतरण में क्षरण होने वाली बिजली के नुकसान को भी घटाया जा सकेगा. विद्युत विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, 'छत्तीसगढ़ से तमिलनाडु को भी एचवीडीसी ट्रांसमिशन लाइन से जोड़ने की योजना तैयार की जा रही है.

इससे एनटीपीसी जैसे पॉवर प्लांटों को फायदा होगा. ऊर्जा मंत्रालय का दावा है कि अगले तीन वर्षों में पूरे देश में 28 हजार मेगावाट की ट्रांसमिशन क्षमता विकसित की जाएगी. इससे भारत में कुल ट्रांसमिशन क्षमता 66 हजार मेगावाट हो जाएगी.

दिया तले अंधेरा

देश के कई प्रांत छत्तीसगढ़ से भेजी जाने वाली बिजली के भरोसे हैं, लेकिन यहां 1200 से ज्यादा गांव अब भी बिजली के तारों से जुड़ने का इंतजार कर रहे हैं. खासतौर से बस्तर संभाग के कई इलाकों में विद्युतीकरण की योजना पहुंची ही नहीं है.

बारहवीं पंचवर्षीय योजना में बिजली उत्पादन के कुल लक्ष्य का लगभग 25 प्रतिशत योगदान छत्तीसगढ़ देगा

यहां साढ़े 18 हजार स्कूल भवन भी विद्युत विहीन हैं. इसके चलते लाखों बच्चों के लिए कम्प्यूटर की शिक्षा एक सपना बनी हुई है. दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन में लगातार तरक्की कर रहा है. 2014-15 में राज्य ने 16 हजार मेगावाट की विद्युत उत्पादन क्षमता हासिल की है.

सरकार का दावा है कि बारहवीं पंचवर्षीय योजना में बिजली उत्पादन के कुल लक्ष्य का लगभग 25 प्रतिशत योगदान छत्तीसगढ़ देगा.

राज्य विद्युत वितरण कंपनी के पीआरओ विजय मिश्रा की अलग ही दलील है. उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में बिजली का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ रहा है. ट्रांसमिशन क्षमता स्थापित होने पर राज्य को बिजली बेचना सुगम हो जाएगा. ज्यादा से ज्यादा बिजली जब अन्य राज्यों में जाएगी तो कृषि और शिक्षा क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी.

First published: 1 February 2016, 18:15 IST
 
शिरीष खरे @catch_hindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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