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कैशलेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए 'आधार पे' का प्रचार तेज

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 January 2017, 16:07 IST

कैशलेस इकोनॉमी और ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने की कोशिश में अब केंद्र सरकार ने 'आधार-पे' का प्रचार तेज करना शुरू कर दिया है. 'आधार-पे' के जरिये लोग सिर्फ अपने 12 अंकों के आधार नंबर से लेन-देन कर सकेंगे. सरकार 'आधार-पे' के जरिये देश के मध्यम और गरीब वर्ग को ई-ट्रांजैक्शन से जोड़ना चाहती है.

दरअसल 'आधार-पे' पहले से जारी आधार इनेबल्ड पेमेंट सर्विस (एईपीएस) का मर्चेंट वर्जन है. यानी ई या ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करने के दौरान पिन और पासवर्ड के स्थान पर आधार नंबर की ही जरूरत होगी. 

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ग्राहक को 'आधार-पे' के जरिये पेमेंट करने के लिए अपना आधार नंबर, बैंक का नाम और फिंगरप्रिंट स्कैन करवाना होगा.

'आधार-पे' सभी एंड्रॉयड स्मार्टफोनों पर काम करता है और इसके लिए यूजर की फिंगर बायोमेट्रिक डिवाइस से कनेक्टेड होनी चाहिए. 

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यूआईडीएआई के सीईओ एबी पांडेय ने कहा, "'आधार-पे के जरिये बिना कार्ड और पिन के कैशलेस भुगतान किया जा सकता है. ग्राहकों के पास स्मार्टफोन होने की कोई जरूरत नहीं."

वहीं, दुकानदारों द्वारा 'आधार-पे' का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमा किया जाए इसके लिए सरकार ने बैंकों की समस्त शाखाओं में 30-40 दुकानदारों को जोड़ने को कहा है. 

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फिलहाल आंध्रा, आईडीएफसी, सिंडीकेट, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इंडसइंड बैंक 'आधार-पे' से जुड़ चुके हैं और जल्द ही कई अन्य बैंकों के जुड़ने की संभावना है.

बताया जा रहा है कि 'आधार-पे' से जुड़कर भुगतान पाने के लिए दुकानदारों को 2,000 रुपये की बायोमेट्रिक डिवाइस खरीदनी होगी. 

सरकार इस मशीन को ईएमआई पर देने के मॉडल को जारी करने की कोशिश कर रही है, जिससे ज्यादा से ज्यादा दुकानदार इसका इस्तेमाल कर सकें.

First published: 23 January 2017, 16:07 IST
 
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