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महिलाओं की रोल मॉडल इन दो महिला बैंकरों की अर्श से फर्श तक की कहानी

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 April 2018, 13:32 IST

चंदा कोचर और शिखा शर्मा भारतीय बैंकिंग में असाधारण महिला शक्ति की प्रतीक हैं. देश के बड़े बैंकों में शुमार ICICI  बैंक और एक्सिस बैंक को ये दोनों लम्बे समय से संभाल रही हैं. दोनों ने परिवर्तन के दौर में भी अपने संस्थानों मजबूती दी.

पुरुषों के कब्जे वाली बैंकिंग इंडस्ट्री में ये दोनों अन्य महिलाओं के लिए रोल मॉडल की तरह थी लेकिन बीते दिनों इन दोनों का नाम बैंकों से जुड़े विवादों में जुड़ा रहा. दोनों के खिलाफ आरोप अलग-अलग हैं. चंदा कोचर पर अपने पति दीपक कोचर से जुड़े व्यापार में मदद करने का आरोप है तो शिखा शर्मा पर एक्सिस बैंक को कुशलतापूर्वक चलाने में नाकाम रहने का आरोप लग रहा है.

एक्सिस बैंक के लगातार बढ़ते एनपीए, कुछ लोन के डायवर्जन और नोटबंदी के दौरान कुछ बैंक अधिकारियों की भूमिकाओं के बाद एक्सिस बैंक बोर्ड में शिखा शर्मा के खिलाफ माहौल बनना शुरू हो गया था और अब उन्होंने खुद इससे अलग होने का मन बना लिया है.

शिखा शर्मा की एंट्री 

हंगामे के बाद शिखा शर्मा एक्सिस बैंक की सीईओ बन गईं. 2009 में उन्होंने सीईओ के तौर पर एक्सिस बैंक की सीईओ की कमान संभाली लेकिन अब रिजर्व बैंक ने चौथी बार उन्हें सीईओ बनाए जाने पर एतराज जताया है. शिखा ने 9 साल के कार्यकाल में एक्सिस बैंक की ग्रोथ में खासी अहम भूमिका निभाई.

2011 में बैंक ने इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को बड़े पैमाने पर लोन देना शुरू किया लेकिन 2015 आते- बैंक का अधिकतर एनपीए फंस गया. सबसे बड़ा झटका को एक्सिस बैंक को नोटबंदी के दौरान लगा जब बैंक के कई अधिकारी नोट बदलने के आरोप में पकड़े गए.

एक्सिस बैंक का एनपीए 

वित्त वर्ष 2017 में एक्सिस बैंक का बैड लोन  21,280 करोड़ तक पहुंच चुका था. रिजर्व बैंक शिखा शर्मा के नेतृत्व में बैंक के कामकाज से खुश नहीं था और आखिरकार बोर्ड ने शिखा शर्मा से नए कार्यकाल के सात महीने के बाद ही बैंक छोड़ने के लिए कहा है.

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दूसरी ओर चंदा कोचर 2008 ने तो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकट के दौर में बैंक के लिए अहम भूमिका निभाई. सरकार ने उन्हें पद्मभूषण से नवाजा और टाइम मैगजीन ने उन्हें दुनिया की 100 ताकतवर महिलाओं की सूची में शामिल किया. 

वीडियोकॉन को आईसीआईसीआई बैंक से 3250 करोड़ रुपये का लोन देने के मामले में बैंक की सीईओ चन्दा कोचर विवादों में फंस गई हैं. उन पर हितों के टकराव का आरोप लग रहा है. इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट  में कहा था कि चंदा कोचर उस समय बैंक की क्रेडिट कमिटी में शामिल थीं, जब वीडियोकॉन ग्रुप को 2012 में 3,250 करोड़ रुपये के कर्ज की मंजूरी दी गई थी.

 रिपोर्ट के अनुसार वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत 2008 में चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर रिन्यूएबल्स में निवेशक थे, हालांकि बाद में उन्होंने अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी. वर्तमान में देश के कार्पोरेट और बैंकों की मिलीभगत को लेक बड़े-बड़े चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. बता दें कि 2017 में यह यह लोन एनपीए घोषित कर दिया गया था.
First published: 15 April 2018, 13:27 IST
 
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