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चंद्रशेखर घोष : महिलाओं की गरीबी देखकर खड़ा कर दिया बंधन बैंक

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 March 2018, 16:34 IST

मार्च 2018 को बंधन बैंक का स्टॉक शेयर बाजार में लिस्ट हुआ. बाजार में लिस्ट होने के बाद बैंक का मार्केट कैप 58,837 करोड़ रुपए हो गया, जो देश की 22 में से 21 सरकारी बैंकों के मार्केट कैप से कहीं ज्यादा है. इसके साथ ही बैंक ने अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया है. बैंक के शेयर ने एक्सचेंज पर लिस्ट होते ही निवेशकों को 33 फीसदी तक का बड़ा मुनाफा दिया.

चंद्रशेखर घोष से मिलिए 

वह गरीबी ही थी जिसने चंद्रशेखर घोष को अमीर बनाया. बंधन बैंक के सीईओ और प्रबंध निदेशक घोष ने अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण सीख ग़रीबी से ली. वह आदमी जिसने अपने जीवन का एक हिस्सा बांग्लादेश और पूर्वी भारत के ग्रामीण इलाकों में बेहद गरीब लोगों के साथ बातचीत में बिताया.

रिपोर्ट के अनुसार 31 दिसंबर 2017 तक बैंक के पास 887 शाखाएं और 430 एटीएम थे, साथ ही पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 23 लाख सामान्य बैंकिंग ग्राहक थे. 1960 में ग्रेटर त्रिपुरा के एक गांव में जन्मे घोष संयुक्त परिवार में छह भाइयों के सबसे बड़े थे और उनके पिता एक छोटी सी मिठाई दुकान चलाते थे. घोष ने दूध बेचने के साथ-साथ ट्यूशन पढ़ाने का भी काम किया.

ढाका विश्वविद्यालय बांग्लादेश से 1978 में सांख्यिकी में एमए करने के बाद घोष ढाका स्थित BRAC में शामिल हुए, जो कि बांग्लादेश के छोटे-छोटे गांवों में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम करता है. वहां उसने जो देखा उसने जीवन बदल दिया. इसी वक़्त ने बंधन बैंक का बीज बोया.

 

महिला सशक्तिकरण पर काम करने के दौरान घोष ने उन महिलाओं की गरीबी भी देखी जो अपने पतियों के बुरे व्यवहार से पीड़ित थी. घोष ने महसूस किया कि इन महिलाओं के पास अपनी ज़िंदगी में सुधार करने की ताकत है, उन्हें कुछ मदद दी जानी चाहिए.

कई वर्षों तक पश्चिम बंगाल में ग्राम कल्याण सोसाइटी के साथ काम करने के बाद, घोष ने गरीब महिलाओं-माइक्रोफाइनांस को सशक्त बनाने के लिए अपने विचार को पंख दिए. 2001 में उन्होंने अपनी ही कंपनी बंधन-कोनगर के जरिये गरीब महिलाओं को 2 लाख रुपये का लोन देना शुरू किया. जिनमें से अधिकांश रिश्तेदारों से उधार लिए गए थे.

घोष कहते हैं, जब मैं हुगली जिले के छोटे गांवों की यात्रा के दौरान महिलाओं को अपने व्यापार और बच्चों की शिक्षा के लिए ऋण लेने के लिए मना रहा था तब वे मुझे संदेह के साथ देख रहे थे. 2009 उन्होंने बंधन को गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी के रूप में पंजीकृत किया और बैंकिंग लाइसेंस प्राप्त करने के बाद यह 2014 में पहला माइक्रोफाइनेंस संस्थान बन गया.

First published: 27 March 2018, 16:28 IST
 
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