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NSC सदस्यों के इस्तीफे के बाद चिदंबरम का मोदी सरकार पर हमला, कहा- एक और संस्था की हुई मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 January 2019, 15:08 IST

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के दो सदस्यों के इस्तीफे को लेकर सरकार पर तीखा हमला करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने बुधवार को कहा कि एक और सम्मानित संस्था ख़त्म हो गई है. उन्होंने कहा ''“29 जनवरी 2019 को सरकार द्वारा दुर्भावनापूर्ण लापरवाही के कारण एक और सम्मानित संस्था की मृत्यु हो गई. अब एनएससी शांति से आराम कर सकता है जब तक कि वह फिर से पैदा न हो! ”

वर्ष 2017-18 के रोजगार और बेरोजगारी पर एनएसएसओ (नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन) के पहले वार्षिक सर्वेक्षण को रोकने के खिलाफ राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के कार्यवाहक अध्यक्ष ने सोमवार को इस्तीफा दे दिया था. जबकि उनके एक अन्य सहयोगी ने भी पद छोड़ दिया था.

दावा किया गया है कि इस सर्वे में नोटबंदी के बाद नौरियों में नुकसान होने की बात सामने आयी थी. एनएससी 2006 में गठित एक स्वायत्त संस्था है और देश की सांख्यिकीय प्रणालियों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा करने का काम करता है. पी सी. मोहनन और जे. वी. मीनाक्षी (दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर) को सरकार द्वारा जून 2017 में एनएससी में सदस्य के रूप में नियुक्त किया था. दोनों का तीन साल का कार्यकाल था. मोहनन इस्तीफा देने से पहले कार्यवाहक अध्यक्ष थे. इन इस्तीफों के बाद NSC के पदेन सदस्य अमिताभ कांत जो संस्था में शेष बचे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार मोहनन ने बताया, “सामान्य एनएसएसओ आयोग को निष्कर्ष प्रस्तुत करता है और एक बार अनुमोदित होने के बाद रिपोर्ट अगले कुछ दिनों के भीतर जारी की जाती है. मोहनन ने कहा हमने दिसंबर की शुरुआत में रोजगार / बेरोजगारी पर एनएसएसओ के सर्वेक्षण को मंजूरी दी गई थी. लेकिन रिपोर्ट को लगभग दो महीने बाद भी सार्वजनिक नहीं किया गया है." मोहनन ने कहा, "यह देखा गया कि सरकार एनएससी को गंभीरता से नहीं लेती है. कई बार एनएससी को बाहर रखकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे. हम अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने में असमर्थ थे.”

रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 के नौकरी के सर्वेक्षण में रोजगार के मोर्चे पर अच्छी तस्वीर पेश नहीं की गई. एनएसएसओ के एक सूत्र ने कहा, यही सबसे बड़ा कारण है कि रिपोर्ट को सार्वजानिक नहीं किया गया. लगभग तीन साल पहले, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने 2004-05 से 2011-12 तक आधार वर्ष में बदलाव के बाद जीडीपी के लिए बैक सीरीज़ डेटा को अंतिम रूप दिया था. उस अभ्यास के कारण यूपीए के वर्षों में विकास दर में सुधार हुआ था, लेकिन तत्कालीन उपाध्यक्ष अरविंद पनागरिया के तहत एनआईटीआई अयोग ने इसकी रिलीज की अनुमति नहीं दी थी.

सीएमआईई के नवीनतम आंकड़ों से पता चला है कि दिसंबर 2018 में बेरोजगारी दर 7.4 प्रतिशत बढ़ी है, जो 15 महीनों में सबसे अधिक है, और 2018 में 11 मिलियन लोगों ने नोटबंदी के बाद नौकरियां गंवा दी थी लेकिन सरकार ने नौकरी के नुकसान से इनकार किया और अक्सर कहा कि कई उद्यमिता नौकरियां पैदा हुई हैं.

First published: 30 January 2019, 15:08 IST
 
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