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प्रसिद्ध पत्रिका 'चंदामामा' के मालिकों पर लगा स्विस बैंक में कालाधन रखने का आरोप

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 March 2019, 13:20 IST

 

भारतीय पौराणिक कथाओं के लिए मशहूर 'चंदामामा' पत्रिका के नए मालिक अब स्विस बैंकों में अवैध धन की चोरी करने के आरोप में घिर गए हैं. मुंबई स्थित जियोडेसिक लिमिटेड ने 2007 में इस प्रतिष्ठित पत्रिका का अधिग्रहण किया था. इसके तीन निदेशकों को कथित मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के लिए भारतीय अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है.

बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार कई अन्य देशों के साथ भारत भी स्विस बैंकों में संदिग्ध काले धन के जमाखोरों का विवरण मांगकर स्विट्जरलैंड के रुख में इस बदलाव का उपयोग कर रहा है और पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या इसकी जानकारी मिल चुकी है. 5 मार्च के एक फैसले में स्विट्जरलैंड के संघीय कर प्रशासन (एफटीए) ने आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, जियोडेसिक लिमिटेड और उसके तीन निदेशकों- प्रशांत शरद मुलेकर, पंकजकुमार ओंकार श्रीवास्तव और किरण कुलकर्णी के संबंध में भारत को प्रशासनिक सहायता देने का फैसला किया है.

 

स्विस कानून के अनुसार एफटीए निर्णय 30 दिनों के भीतर अपील की जा सकती है, बशर्ते अपीलकर्ता इसे चुनौती देने के लिए पर्याप्त आधार देने में सक्षम हो. इससे पहले 30 अक्टूबर 2018 को भी एफटीए ने जियोडेसिक लिमिटेड और तीन व्यक्तियों के संबंध में प्रशासनिक सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया था. इसी तरह के एक मामले में एफटीए ने 5 मार्च को चेन्नई स्थित इकाई, एधी एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के मामले में भारत को प्रशासनिक सहायता प्रदान करने का भी फैसला किया था.

इस निर्णय को 30 दिनों के भीतर अपील की जा सकती है. जियोडेसिक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध इकाई हुआ करता था और पहले ही कई उल्लंघनों के लिए पूंजी बाजार नियामक सेबी के क्रोध का सामना कर चुका है. अगस्त 2014 के बाद से इसके शेयरों का कारोबार नहीं हुआ है, जब इसकी शेयर की कीमत 1.50 रुपये कम हो गई थी.

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First published: 11 March 2019, 13:03 IST
 
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