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'बॉयकॉट चाइना' अभियान से चीन में हलचल, बोला- अमेरिका की नक़ल नहीं कर सकता भारत

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2020, 11:24 IST

भारत और चीन के बीच सीमा पार झड़प के बाद भारत में 'बॉयकॉट चाइना' (BoyCottChina) अभियान जोर पकड़ रहा है. कई लोग सोशल मीडिया पर इस अभियान के समर्थन में आगे हैं. चीन में भी भारत के बॉयकॉट चाइना अभियान की चर्चा है. चीन इस अभियान को कितनी गंभीरता से ले रहा है, इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सका है कि वहां का सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स इस पर लगातार एडिटोरियल लिख रहा है. चीन का कहना है कि भारत को यह अभियान नुकसान पहुंचाएगा. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि कई लोग चीन के मोबाइल फोन और टीवी सेट को तोड़ रहे हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बहिष्कार अभियान चला रहे हैं.

ग्लोबल टाइम्स लिखा कि भारत में स्थानीय व्यापारियों के संगठन, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भारत में व्यापारियों को चीनी वस्तुओं का बहिष्कार करने और स्वदेशी उत्पादों का समर्थन करने के लिए कहा है. सीएआईटी ने चीन से आयात की जाने वाली 500 श्रेणियों की सूची जारी की, जिसमें कहा गया था कि कपडे, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और खिलौने जैसे भारतीय-निर्मित सामानों को चीनी सामान की जगह बदला जा सका है. अख़बार लिखता है कि 2019 के अंत तक लगभग 1,000 चीनी कंपनियों ने भारत में निवेश किया है, जिसमें 8 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश और स्थानीय बाजार में 200,000 नौकरियां सृजित की गई हैं.


एक अन्य संपादकीय में अख़बार ने लिखा कि सीमा पर चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच एक गंभीर झड़प के बाद भारतीय जनता में राष्ट्रवाद जागा है. अख़बार ने भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह के चीनी सामान के बहिष्कार करने के आह्वान का भी जिक्र किया है. अख़बार में सेवानिवृत्त भारतीय सेना प्रमुख रणजीत सिंह के बयान का भी जिक्र किया है, जिसमें लोगों से चीनी सामान बाहर फेंक आर्थिक कमर तोड़ने की बात कही गई है.

ग्लोबल टाइम्स ने  लिखा है कि भारत, चीन के लगभग 300 उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने और देश के 4जी नेटवर्क में चीनी उपकरणों को बदलने और भारतीय उत्पादों का उपयोग करने की योजना बना रहा है. अख़बार लिखता है कि कट्टरपंथी ताकतें हर साल चीनी उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान करती रही हैं लेकिन चीन-भारत व्यापार का विस्तार होता रहा है. भारत चीन से अधिक से अधिक वस्तुओं का आयात कर रहा है, जिसके कारण भारत को हर साल चीन के साथ अरबों के व्यापार घाटे का सामना करना पड़ता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में कई चीनी उत्पादों का उत्पादन नहीं किया जा सकता है और भारत पश्चिम से इन उत्पादों को इस कीमत पर नहीं खरीद सकता है.

कहा गया है उदाहरण के लिए भारतीय चीनी मोबाइल फोन का उपयोग कर रहे हैं. चीनी लैंप, चीनी मिट्टी की चीज़ें और सूटकेस भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सबसे उपयुक्त हैं. अख़बार ने लिखा है कि चीन की जीडीपी भारत से लगभग पांच गुना है. इसलिए भारत ट्रेड वॉर में अमेरिका की नकल नहीं कर सकता. चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ने पर भारत को अधिक नुकसान होगा और भारतीय लोगों की आजीविका को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. अंत में अख़बार लिखता है कि कुछ भारतीय राजनीतिक ताकतों और जनमत को अपने सैनिकों को सीमा पर उत्तेजक कार्रवाई करने के लिए उकसाना बंद करना चाहिए.

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First published: 20 June 2020, 11:12 IST
 
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