Home » बिज़नेस » Claiming for rebate in ITR through HRA allowance be cautious
 

टैक्स बचाने के लिए आप भी करते हैं ये काम तो हो जाएं समय रहते सावधान

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 July 2018, 15:41 IST

अभी आयकर रिटर्न फाइल यानी आईटीआर (ITR) फाइल करने का समय है. ऐसे में बहुत से वेतनभोगी लोग इनकम टैक्स बचाने के लिए हाउस रेंट एलाउंस यानी एचआरए के तहत मिलने वाली राशि पर टैक्स की बचत करते हैं.

दरअसल आईटीआर फाइल करते वक्त लोग किरायेदार के रुप माता-पिता का नाम दे देते हैं और किराये का पैसा घर में रह जाता है. साथ ही इस रकम पर उन्हें कोेई टैक्स भी नहीं चुकाना पड़ता है.

गौरतलब है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10 (13 ए) के तहत किसी भी वेतनभोगी को एचआरए के तौर पर उसके मूल वेतन का 50 फीसदी दिया जाता है. इसके अलावा एचआरए के रुप में मिलने वाली इस रकम में जितना किराया होता है, उसमें से मूल वेतन का 10 फीसदी घटा कर जो रकम बचती है. उस रकम पर आयकर से छूट मिलती है.

इसलिए बहुत-से नौकरीपेशा लोग छूट हासिल कर अपने माता- पिता के नाम किराये की रसीद लेते हैं. जिससे उनका पैसा घर में रह जाता है और इस राशि पर वो टैक्स भी नहीं चुकाते हैं. लेकिन इस बार इस तरह टैक्स बचाने वाले लोग के लिए ज़रूरी बात यह है कि माता- पिता को भी इस किराये को अपनी आय में दिखाकर इस पर टैक्स देना ज़रूरी है.

ये भी पढ़ें-मोदी सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, धान के MSP में 200 रुपये का इजाफा

साथ हीं इस बात का भी ध्यान रहे कि जिस मकान का किराया नौकरीपेशा व्यक्ति अदा करने का दावा कर रहा है, वह उसके नाम पर नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा यह भी जरुरी हो कि मां या पिता को दिया जाने वाला किराया बैंक के ज़रिये दिया जाए, और इस राशि को उनके मां-पिता की कमाई मानकर उस रकम पर इनकम टैक्स अदा करें.

First published: 4 July 2018, 15:41 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी