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1 लाख करोड़ की नीलामी, अगले महीने लगेगी देश में खदानों की सबसे बड़ी बोली

सुहास मुंशी | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

भारत सरकार द्वारा की जाने वाली राष्ट्रीय संसाधनों की सबसे बड़ी नीलामी अगले महीने शुरू हो रही है. इस बार की नीलामी में खदानों की बड़ी संख्या हथौड़े की थाप की जद में होगी. इसके तहत 33 खदानों की नीलामी तत्काल की जाएगी और बाकी बचे हुए 80 खदानों की नीलामी आने वाले महीनों में की जाएगी.

इस नीलामी में सबसे अधिक महत्वपूर्ण होगी अगस्त के महीने में होने वाली लौह अयस्क के 14 खदानों की नीलामी. एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अगर सबकुछ ठीक रहता है तो राज्य और केंद्र सरकार को इस वित्तीय वर्ष के अंत तक करीब एक लाख करोड़ रुपये तक की आमदनी हो सकती है.

यह एक बड़ी रकम है और चालू वित्तीय वर्ष में राज्य और केंद्र सरकारों के लिये संभवतः आय के सबसे बड़े स्रोत में से एक है. यह नीलामी काफी हद तक पिछले महीने केंद्रीय मंत्रीमंडल द्वारा अनुमोदित की गई वृहद स्पेक्ट्रम नीलामी की तरह है जिससे उसे करीब 5.66 लाख करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है.

नीलामी के शुरुआती चरण में खनन मंत्रालय लौह अयस्क, सोना, टंगस्टन, बाॅक्साइट, चूना पत्थर और काॅपर जैसे खनिजों की कुल 33 खदानों की नीलामी के प्रयास कर रही है. इसके अगले चरण में 80 खानों की नीलामी की जाएगी.

सबसे अधिक महत्वपूर्ण होगी अगस्त के महीने में होने वाली लौह अयस्क के 14 खदानों की नीलामी

सूत्रों का कहना है कि मंत्रालय फिलहाल अपनी आॅनलाइन नीलामी अर्जियों के परीक्षण में व्यस्त है और इस काम में शामिल विभिन्न राज्य सरकारों के साथ भी उसकी बातचीत चल रही है.

एक अधिकारी कहते हैं, ‘पूर्व खनन मंत्री ने हाल ही में सभी राज्यों के खनन मंत्रियों की एक बैठक की अध्यक्षता की जिसमें सभी प्रमुख खनिज ब्लाॅकों की ई-नीलामी, डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) और नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (एनएमईटी) के प्रबंधन, अवैध खनन को रोकने की प्रभावी तैयारी, खनन और खनिजों के काम की समीक्षा के लिये आईटी की मदद लेने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.'

केंद्र सरकार इस बार नीलामी को लेकर काफी अधिक चौकसी बरत रही है, क्योंकि उसके द्वारा कुछ दिन पूर्व की गई पिछली नीलामी में मनमाफिक नतीजे नहीं मिल पाए थे.

सरकार द्वारा पिछली नीलामी नौ महीने पूर्व की गई थी जिसमें 12 राज्यों की कुल 47 खदानों के लिये नीलामी खुली थी लेकिन सिर्फ सात ब्लाॅक ही नीलाम हो पाए. गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र की खदानों को तो एक भी खरीददार नहीं मिला.

लेकिन इसके बावजूद जिन खदानों की नीलामी हुई उन्होंने केंद्र सरकार को अच्छा राजस्व दिया और इस बात की पूरी संभावना है कि वे आने वाले दिनों में राज्य सरकारों के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी.

सरकार को इन सात खदानों की नीलामी में कुल 18,490 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. इनमें से उड़ीसा की एक खदान रुइया परिवार की कंपनी एस्सार समूह ने भी हासिल की. राॅयल्टी, डीएमएफ और एनएमईटी के माध्यम से राज्य सरकार को इस खदान से आने वाले 50 वर्षों में करीब 11,328 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की संभावना है.

खनन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, ‘हमारे द्वारा हाल ही में की गई नीलामी के नतीजे हमारी उम्मीदों के अनुसार नहीं रहे लेकिन इस बार हम आने वाली नीलामियों में और अधिक प्रयास करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. अब हमारा आने वाले दिनों का प्रदर्शन अगले महीने कर्नाटक में लौह-अयस्क खदान ब्लाॅक की नीलामी में हमारे प्रदर्शन पर निर्भर रहेगा. साथ ही यह हमें राजस्व कमाने और टारगेट पूरा करने में भी मदद करेगी.’

मांग में तेजी

यह नीलामी इसलिये भी काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि मोदी सरकार चाहती है कि भारत में होने वाला लौह अयस्क का उत्पादन देश के इस्पात उद्योग की तेजी से बढ़ती हुई मांग को पूरा करने लायक हो सके. ऐसे में लौह अयस्क के उत्पादन को लेकर दिखाया गया ढीला रवैया लंबे समय के लिये लौह अयस्क के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है.

उम्मीद है कि 2025 तक भारत के इस्पात निर्माताओं को प्रतिवर्ष 500 मिलियन टन की आवश्यकता होगी लेकिन तबतक भारत के धातु के उत्पादन के सिर्फ 300 मिलियन टन तक ही पहुंचने की उम्मीद है. इस मांग की पूर्ति करने के लिये मोदी सरकार ने देश के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक, सरकारी कंपनी एनएमडीसी के लिये एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है.

सरकार चाहती है कि 2020-21 तक एनएमडीसी कम से कम 100 मिलियन टन का उत्पादन करे. वर्तमान में उनका उत्पादन 40 मिलियन टन भी नहीं है. सरकार के अपने आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011-12 में लौह अयस्क का उत्पादन 169 मिलियन टन और 2012-13 में 137 मिलियन टन था जबकि इन्हीं वर्षो में खपत 101 मिलियन टन और 103 मिलियन टन थी. पिछले वित्त वर्ष में देश में कुल 155 मीट्रिक टन अयस्क का खनन हुआ जबकि उससे बीते वर्ष यह आंकड़ा 129 मीट्रिक टन था.

First published: 25 July 2016, 7:51 IST
 
सुहास मुंशी @suhasmunshi

प्रिंसिपल कॉरेसपॉडेंट, कैच न्यूज़. पत्रकारिता में आने से पहले इंजीनियर के रूप में कम्प्यूटर कोड लिखा करते थे. शुरुआत साल 2010 में मिंट में इंटर्न के रूप में की. उसके बाद मिंट, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और मेल टुडे में बाइलाइन मिली.

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