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बिना फंड के कैसे लड़ेगी कांग्रेस 2019 का चुनाव, तेजी से खाली हो रहा खजाना

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 May 2018, 17:07 IST

साल 2019 में देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस को वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है. एक रिपोर्ट की मानें तो कांग्रेस को चंदा देने वालों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. पिछले पांच महीनों में कांग्रेस नेतृत्व ने विभिन्न राज्यों में अपने कार्यालयों को फंड नहीं भेजा.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट की मानें तो पार्टी के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी ने अपने कैडर से योगदान बढ़ाने और पार्टी नेताओं से खर्च में कटौती करने का आग्रह किया है. कांग्रेस की सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख दिव्य स्पंदाना ने ब्लूमबर्ग से कहा, "हमारे पास पैसा नहीं है." उन्होंने कहा कि बीजेपी के विपरीत उनकी पार्टी को नए पेश किए गए इलेक्टोरल बॉन्ड धन नहीं मिल रहा.

इस नई योजना के तहत चंदा देने वाले भारतीय स्टेट बैंक की निर्दिष्ट शाखाओं से वर्ष में 40 दिनों में इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद सकते हैं और राजनीतिक दलों को चंदा के लिए इसे दो सप्ताह के भीतर उपयोग कर सकते हैं.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2012-13 और 2015-16 में पांच राजनीतिक पार्टियों को मिले चंदे 956.77 करोड़ में से 705.81 करोड़ रुपये बीजेपी को कॉर्पोरेट घरानों से मिले. बीजेपी को 2,987 कॉर्पोरेट घरानों ने चंदा दिया. इस अवधि में कांग्रेस को 167 कॉर्पोरेट दाताओं से सिर्फ 198.16 करोड़ रुपये मिले.

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के संस्थापक और ट्रस्टी जगदीप छोकार ने ब्लूमबर्ग से कहा कि 2019 के चुनाव से पहले कांग्रेस को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा, "जिस पार्टी के पास पैसा नहीं है उसे चुनावों बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार 2014 के आम चुनावों के दौरान, बीजेपी ने 5.88 अरब रुपये एकत्र किए, जबकि कांग्रेस ने 3.50 अरब रुपये इकट्ठा किये. कांग्रेस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वह इस संकट से निपटने के लिए काम कर रही है और खर्च पर सख्त प्रतिबंध लगा रही थीं.

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First published: 23 May 2018, 17:01 IST
 
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