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कोरोना संकट: भारत में 40 करोड़ श्रमिकों के फिर से गरीबी में जाने का खतरा : ILO

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 April 2020, 11:37 IST

कोरोना वायरस : इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि COVID-19 महामारी के बाद लगाए गए लॉकडाउन के कारण विश्व स्तर पर 2.7 बिलियन श्रमिक प्रभावित हुए हैं. कहा गया है कि भारत में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लगभग 40 करोड़ श्रमिकों के COVID-19 महामारी संकट के दौरान गरीबी में जाने का खतरा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, नाइजीरिया और ब्राजील में लॉकडाउन जैसे उपायों से प्रभावित अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में श्रमिकों की संख्या सबसे ज्यादा है.

ILO ने कहा कि भारत में मौजूदा लॉकडाउन का उन श्रमिकों को ज्यादा असर हुआ है, जो वापस अपने गांवों में आ गए हैं. कहा गया है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में अनौपचारिक रोजगार वाले श्रमिकों तक स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा की पहुंच भी सीमित है. अगर उचित नीतिगत उपाय नहीं किये गए तो इस दौरान अपनी आजीविका प्राप्त करने में इन लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.


ILO ने उल्लेख किया कि COVID-19 महामारी तेजी से दुनियाभर में फैली है और इसके बाद लॉकडाउन उपाय अब लगभग 2.7 बिलियन श्रमिकों को प्रभावित कर रहे हैं, जो दुनिया के लगभग 81 प्रतिशत वर्कफाॅर्स के बराबर है.  कई देशों में बड़े पैमाने पर (अक्सर अभूतपूर्व) पैमाने पर रोजगार कम होना शुरू हो चुका है.

1 अप्रैल 2020 तक ILO के नए वैश्विक अनुमानों से संकेत मिलता है कि 2020 की दूसरी तिमाही में काम करने के घंटे 6.7 प्रतिशत घट जाएंगे, जो 195 मिलियन फुल टाइम श्रमिकों के बराबर है. ILO का अनुमान है कि वैश्विक कार्यबल के लगभग 38 प्रतिशत या 1.25 बिलियन श्रमिक उन सेक्टर में काम करते हैं, जहां अब उत्पादन में भारी गिरावट आयी है. इन क्षेत्रों में रिटेल ट्रेड, आवास और खाद्य सेवाएं और विनिर्माण शामिल हैं.

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First published: 8 April 2020, 11:13 IST
 
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