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इंटरनेशनल बाजार में गिरे कच्चे तेल के दाम, लेकिन भारत में बढ़ोतरी 15वें दिन भी जारी रही

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 May 2018, 11:57 IST

पेट्रोल और डीजल की कीमत में लगातार 15वें दिन भी बढ़ोतरी देखी गई जिसके बाद सोमवार को देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम 78.27 पैसे हो गई . जबकि मुंबई में अब यह 86.08 पैसे और कोलकाता में 80.76 पैसे पहुंच गई. कच्चे तेल की इंटरनेशनल कीमतों पर ध्यान दें तो पिछले 5 दिनों में इसमें लगभग 5 रूपये की गिरावट आयी है लेकिन भारत में तेल कंपनियों ने इसमें बढ़ोतरी 15वें दिन भी लगातार जारी रखी.

आंकड़ों का विश्लेषण करने से पता चलता है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें ने केवल उच्चतम हैं बल्कि शीर्ष 10 कच्चे तेल की खपत करने वाले देशों में चौथे स्थान पर है. दुनिया के सभी देशों में कच्चे तेल की कीमतों के लिए वैश्विक कीमत महत्वपूर्ण है लेकिन प्रत्येक में खुदरा कीमत वहां के टैक्स पर निर्भर करती है. शीर्ष 10 उपभोक्ताओं की इस सूची में भारत सबसे महंगी कीमत वाले देशों में से एक है.

आंकड़ों से पता चलता है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक, सऊदी अरब में टॉप 10 सबसे कच्चे तेल के उपभोक्ता में से सबसे सस्ती कीमत है. जहां पेट्रोल के लिए 0.54 डॉलर प्रति लीटर और डीजल के लिए 0.13 डॉलर प्रति लीटर देना पड़ता है.

वर्तमान में भारत में पट्रोल की कीमत 1.19 डॉलर प्रति लीटर है जबकि अमेरिका में यह 0.85 चीन में 1.18 डॉलर, जापान में 1.33 डॉलर प्रति लीटर, रूस में 0.71 डॉलर प्रति लीटर और जर्मनी में 1.68 डॉलर सबसे ज्यादा है. एक रिपोर्ट की मानें तो पेट्रोल डीजल पर सरकार फ़िलहाल एक्साइज ड्यूटी काम करने के मूड में नहीं है. सरकार इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के कम होने का इंतज़ार कर रही है.

सरकार का मानना है कि पेट्रोल डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने से उसके रेवेन्यू पर बड़ा असर पड़ेगा और इससे कल्याणकारी योजनाएं मुश्किल में पड़ जाएंगी क्योंकि सरकार 2019 के चुनावों से पहले इनपर ज्यादा खर्च करना चाहती है.

इस मामले में सरकार अन्तरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर नजर रखे हुई है. हालांकि पिछले दो दिनों में तेल की कीमतों में 2 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट आई है. सरकार ने उपभोक्ताओं को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए कर्नाटक चुनाव के दौरान कीमतें नहीं बढ़ने दी थी. इसी साल नवंबर में राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में चुनाव हैं इसलिए सरकार तेल की कीमतों के कम होने के लिए इंटरनेशनल बाजार का ही इंतज़ार कर रही है.

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First published: 28 May 2018, 11:53 IST
 
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