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मिस्त्री चाहते थे नैनो का प्रोडक्शन बंद हो, टाटा थे खिलाफ

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 October 2016, 9:59 IST
(एजेंसी)

टाटा समूह के चेयरमैन पद से बिना किसी पूर्व सूचना के हटाए जाने के बाद साइरस पालोनजी मिस्‍त्री ने इस मामले में टाटा बोर्ड को एक ई-मेल लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की.

मिस्त्री ने बोर्ड को लिखे अपने ई-मेल में रतन टाटा की महत्वाकांक्षी परियोजना नैनो को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किये हैं.

उन्होंने लिखा है कि टाटा के लिए घाटे में चल रही नैनो परियोजना को सफल बना पाना बेहद मुश्किल भरा काम है. उनके मुताबिक नैनो परियोजना टाटा के कारोबारी इतिहास में सबसे असफल साबित होगी और वह इसे बंद करना चाहते थे.

मिस्त्री ने अपने ई-मेल में यहां तक कहा है कि नैनो को बंद किये बगैर टाटा मोटर्स को एक लाभप्रद इकाई में तब्दील नहीं किया जा सकता. इन आरोपों के साथ मिस्त्री ने रतन टाटा को भी इस मामले में घसीट लिया है लेकिन उन्होंने निश्चित तौर पर नैनो के भविष्य को लेकर अहम प्रश्न खड़े कर दिए हैं.

नैनो को लेकर मिस्त्री ने रतन टाटा की सत्यनिष्ठा व कॉरपोरेट गवर्नेस के उनके इरादे पर भी सवाल उठा दिए हैं.

मिस्त्री ने लिखा, "हम नैनो को इसलिए बंद नहीं कर सके क्योंकि इससे भावनात्मक मुद्दा जुड़ा हुआ था और ऐसा करने का मतलब होता कि इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली एक ऐसी कंपनी को 'ग्लाइडर' की आपूर्ति बंद हो जाती, जिसमें रतन टाटा की बड़ी हिस्सेदारी है."

इसके बाद उन्होंने लिखा है कि एक लाख की कीमत के भीतर कार बनाने की यह योजना शुरू से ही लागत से ज्यादा की रही. इस परियोजना पर टाटा समूह को एक हजार करोड़ रुपये की हानि उठानी पड़ी है.

गौरतलब है कि रतन टाटा ने नैनो कार को आम जनता की कार कहकर लॉन्च किया था, लेकिन यह कार कभी भी भारतीय ग्राहकों की पसंद नहीं बन पाई.

नैनो यानी लखटकिया कार रतन टाटा की बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना थी, जो मिस्त्री के मुताबिक पूरी तरह से फेल हो गई.

First published: 27 October 2016, 9:59 IST
 
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